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कोटपूतली-बहरोड़ में अनोखी मिसाल, वीडियो में देखें दूल्हे और पिता ने ठुकराया 31 लाख का दहेज, बोले– ‘बेटी ही सबसे बड़ा धन’

https://youtu.be/ArEO64OA1Uw

राजस्थान के कोटपूतली बहरोड़ जिला के बानसूर क्षेत्र के बिलाली गांव से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने समाज के सामने सकारात्मक उदाहरण पेश किया है। यहां एक शादी समारोह के दौरान दूल्हे और उसके पिता ने दहेज में दी जा रही लाखों रुपए की रकम लेने से साफ इनकार कर दिया और पूरी राशि लड़की पक्ष को लौटा दी। इस अनोखे फैसले की अब पूरे इलाके में चर्चा हो रही है और लोग इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश के रूप में देख रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, विवाह समारोह के दौरान दुल्हन विशाखा राठौड़ के पिता करणी सिंह राठौड़ ने पारंपरिक रिवाज के तहत दहेज के रूप में 31 लाख रुपए देने की पेशकश की। लेकिन जैसे ही यह राशि दूल्हे पक्ष को सौंपी जाने लगी, दूल्हे और उसके पिता जालिम सिंह ने इसे लेने से मना कर दिया।

दूल्हे के पिता जालिम सिंह ने भावुक अंदाज में कहा, “आपने अपनी बेटी हमें सौंप दी है, वही हमारे लिए सबसे बड़ा दहेज है। बेटी किसी भी धन-दौलत से कहीं अधिक मूल्यवान होती है।” उनके इस बयान ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। जालिम सिंह ने मौके पर ही पूरी राशि दुल्हन के पिता को वापस लौटा दी। इस घटना को देखकर शादी में मौजूद मेहमानों ने तालियों से उनका स्वागत किया और इस फैसले की सराहना की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आज भी समाज के कई हिस्सों में दहेज प्रथा एक बड़ी सामाजिक बुराई बनी हुई है। कई परिवार आर्थिक बोझ के कारण बेटियों की शादी को लेकर चिंतित रहते हैं। ऐसे में इस तरह का कदम समाज को नई दिशा दे सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि दूल्हे पक्ष का यह फैसला युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। इससे यह संदेश जाता है कि रिश्तों की अहमियत पैसों से कहीं ज्यादा होती है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर समाज के लोग इसी तरह सोच बदलें, तो दहेज जैसी कुरीति को खत्म किया जा सकता है। यह घटना न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकती है।

कुल मिलाकर, बिलाली गांव की इस शादी ने यह साबित कर दिया कि असली खुशी और सम्मान पैसों से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और रिश्तों से मिलता है। दूल्हे और उसके पिता का यह कदम दहेज मुक्त समाज की दिशा में एक प्रेरक पहल माना जा रहा है।

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