जयपुर में गोशालाओं की समस्याओं के समाधान के लिए बनेगी कमेटी, वीडियो में जाने 100 करोड़ रुपए की ऑडिट रिकवरी का मुद्दा उठा
राजस्थान में गोशालाओं की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए अब कमेटी बनाई जाएगी। शुक्रवार को टोंक रोड स्थित श्री पिंजरापोल गोशाला में आयोजित गो अधिकार हुंकार रैली और महासम्मेलन में गोशाला संचालकों ने बकाया राशि की वसूली, सब्सिडी में देरी, पानी की व्यवस्था और जमीन आवंटन जैसे मुद्दे उठाए। कार्यक्रम में गोशालाओं के खातों से ऑडिट रिकवरी के नाम पर निकाले गए करीब 100 करोड़ रुपए का मामला भी प्रमुखता से उठाया गया। आयोजकों के अनुसार, कमेटी के माध्यम से गोशालाओं से जुड़ी समस्याओं पर विचार कर उनके समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
हजारों गोसेवक हुए महासम्मेलन में शामिल
राजस्थान गोसेवा समिति के बैनर तले आयोजित गो अधिकार हुंकार रैली में हजारों की संख्या में गोसेवक और गोशाला संचालक शामिल हुए। सम्मेलन में गोशालाओं की आर्थिक स्थिति और संचालन से जुड़ी परेशानियों पर चर्चा की गई।गोशाला संचालकों ने गोशालाओं से बकाया राशि वसूलने का विरोध किया। उनका कहना था कि गोवंश की देखभाल और गोशालाओं के संचालन के लिए पहले से ही कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में खातों से बड़ी रकम की रिकवरी होने से उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
100 करोड़ रुपए की ऑडिट रिकवरी का मुद्दा
महासम्मेलन में गोशालाओं के खातों से ऑडिट रिकवरी के नाम पर निकाले गए करीब 100 करोड़ रुपए का मुद्दा उठाया गया। गोशाला संचालकों ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए राशि की वसूली का विरोध किया और मामले के समाधान की मांग की।इसके साथ ही गोशालाओं को समय पर सब्सिडी उपलब्ध कराने, पशुओं के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था करने और गोशालाओं को जमीन आवंटित करने की मांग भी रखी गई। संचालकों का कहना था कि गोवंश की देखभाल के लिए नियमित आर्थिक सहायता और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है।
शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने दिया गोसेवा पर जोर
महासम्मेलन में द्वारिका पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती और मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज भी पहुंचे। शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में कहा कि गोवंश की देखभाल के लिए समाज और सरकार, दोनों की भागीदारी जरूरी है।उन्होंने गोशालाओं में चारा, पानी और इलाज जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। गोवंश के संरक्षण के लिए केवल धार्मिक भावना ही नहीं, बल्कि नियमित देखभाल और पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था भी जरूरी है।
कमेटी के जरिए समस्याओं के समाधान की उम्मीद
रैली में उठाए गए मुद्दों के बाद गोशालाओं की समस्याओं पर विचार करने और उनके समाधान की दिशा में कदम उठाने के लिए कमेटी बनाए जाने की बात सामने आई है। गोशाला संचालकों को उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से लंबित मामलों पर चर्चा होगी और उनकी मांगों पर उचित निर्णय लिया जा सकेगा।अब गोशाला संचालकों की नजर कमेटी के गठन और उसके जरिए होने वाली कार्रवाई पर रहेगी। खास तौर पर ऑडिट रिकवरी, सब्सिडी के भुगतान, पानी की व्यवस्था और जमीन आवंटन जैसे मुद्दों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा।

