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राजस्थान से 28 पाकिस्तानियों को दिखाया बाहर का रास्ता, वीडियो में जाने किन पर होगा पहले एक्शन

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केंद्र सरकार द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद दिखाई गई सख्ती का असर अब जमीन पर साफ नजर आने लगा है। देश में पाकिस्तान से आए नागरिकों को उनके वतन वापस भेजने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी कड़ी में राजस्थान सरकार ने भी बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को राज्य सरकार ने 28 पाकिस्तानी नागरिकों को उनके देश वापस भेज दिया।

गौरतलब है कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके में हुए आतंकी हमले ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इस हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक उच्चस्तरीय बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने राज्यों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों की जांच करें और जो लोग अवैध रूप से रह रहे हैं या जिनकी वीज़ा अवधि समाप्त हो चुकी है, उन्हें तत्काल प्रभाव से वापस भेजा जाए।

इसी आदेश के मद्देनज़र राजस्थान सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 28 पाकिस्तानियों को उनके देश भेज दिया। इन नागरिकों में वे लोग शामिल थे जिनकी वीज़ा अवधि समाप्त हो चुकी थी, या जो लंबे समय से भारत में रह रहे थे, लेकिन उनके पास कानूनी दस्तावेज पूरे नहीं थे।

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी प्रक्रियाओं के तहत की गई है। संबंधित नागरिकों को उनके दूतावास से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि के बाद ही सीमा पर भेजा गया है। सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी निगरानी में इन्हें वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान रवाना किया गया।

वहीं, गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है। अन्य राज्यों में भी ऐसी ही कार्रवाई की जा रही है और जल्द ही और भी पाकिस्तानी नागरिकों को उनके देश लौटाया जाएगा। केंद्र सरकार का मानना है कि भारत की सुरक्षा के लिहाज से यह एक जरूरी कदम है और इसमें किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।

राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे को लेकर हलचल तेज है। कुछ विपक्षी दलों ने केंद्र की इस नीति को 'राजनीतिक कदम' करार दिया है, वहीं सरकार समर्थक दलों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे समय की मांग बताया है।

बहरहाल, पहलगाम हमले के बाद केंद्र की सक्रियता और राज्यों की तत्परता यह दर्शाती है कि अब भारत अपनी आंतरिक सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहता। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य राज्यों में इस संबंध में क्या कदम उठाए जाते हैं और यह अभियान किस स्तर तक पहुंचता है।

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