इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का कहर, फुटेज में जानें मौतों की संख्या 20 तक पहुंची, प्रशासन के दावों पर उठे सवाल
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार, इस घटना में मरने वालों की संख्या 18 से बढ़कर 20 हो गई है। हालांकि, सरकार ने हाईकोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में अब तक सिर्फ चार मौतें ही दूषित पानी से होना स्वीकार किया है। इस विरोधाभास ने प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच गहरे अंतर को उजागर कर दिया है।
स्थानीय लोगों और मृतकों के परिजनों का कहना है कि इलाके में बीते कई दिनों से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा था। इसी पानी के सेवन से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े, जिनमें से कई की हालत गंभीर होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन लगातार मौतों के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग बयान दे रहा है।
प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक 18 मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। बुधवार को प्रशासन द्वारा तैयार की गई मुआवजा सूची में दो नए नाम और जोड़े गए हैं। इनमें रामकली जगदीश और श्रवण नत्यु खुपराव शामिल हैं। इन नामों के जुड़ने के बाद यह साफ हो गया है कि मौतों की संख्या सरकारी रिपोर्ट से कहीं अधिक है।
अधिकारियों का कहना है कि भले ही जांच में अभी तक दूषित पानी से छह मौतें ही प्रमाणित हुई हों, लेकिन जहां-जहां मौत की सूचना मिल रही है, वहां क्रॉस चेक कर परिजनों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। प्रशासन का यह भी दावा है कि किसी भी पीड़ित परिवार को राहत से वंचित नहीं रखा जाएगा। हालांकि, सवाल यह उठता है कि जब मुआवजा 18 से ज्यादा परिवारों को दिया जा चुका है, तो हाईकोर्ट में केवल चार मौतें ही क्यों स्वीकार की गईं।
इस पूरे मामले के बीच एक और गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिस स्थान पर हाल ही में ड्रेनेज लाइन का काम किया गया था, वहां बुधवार को जैसे ही नर्मदा जल आपूर्ति लाइन चालू की गई, पानी लीक होकर कॉलोनी में भरने लगा। देखते ही देखते दुकानों और घरों में पानी घुस गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात बिगड़ते देख नर्मदा लाइन को दोबारा बंद करना पड़ा।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ड्रेनेज और पानी की लाइनें पास-पास होने के कारण गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल गया, जिससे यह भयावह स्थिति बनी। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे इलाके में पानी की पाइपलाइन और ड्रेनेज सिस्टम की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
भागीरथपुरा की यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि बुनियादी सुविधाओं में छोटी सी चूक कितनी बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस मामले में कितनी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ आगे की कार्रवाई करती है।

