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Indore के विद्यार्थियों ने जानी मोगली के हथियार बूमरैंग थ्रो करने की तकनीक
 

Indore के विद्यार्थियों ने जानी मोगली के हथियार बूमरैंग थ्रो करने की तकनीक


मध्यप्रदेश न्यूज़ डेस्क, इंदौर में पहली बार मोगली के हथियार बूमरैंग पर एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया . इस वर्कशॉप में ट्रेनिंग देने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बूमरैंग प्लेयर्स ने इंदौर आए. इन प्लेयर्स ने स्टूडेंट्स को बूमरैंग की बारीकियां बताईं . भारत में मोगली का खेल के रूप में जाने वाले खेल बूमरैंग अपने आप में अद्भुत और अद्वितीय है.

ऑस्ट्रेलिया में पालन-पोषण पाकर यह खेल आज विश्व के करीब 40 देशों में प्रचलित है. बूमरैंग एसोसिएशन के फाउंडर विवेक मोन्ट्रोस ने बताया कि ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी केन कालबंग बूमरैंग खेल विशेषज्ञ थे. अपने भारत भ्रमण के समय इस खेल के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित किया. उनके संपर्क में आने के बाद विवेक की रुचि इस खेल के प्रति जागृत हुई कि, एक ऐसी वस्तु जिसे फेंको जो अपने पास वापस आ जाए. प्राचीन काल में बूमरैंग भले एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाते थे किन्तु आज तरह - तरह के बूमरैंग्स और उनको थ्रो करने के तरीके हैं. विवेक ने यह खेल विधिवत सीख कर पहला भारतीय खिलाड़ी होने का गौरव हासिल किया. इस संस्थान ने भारत देश के कई राज्यों और शहरों में बूमरैंग के बहुत से खिलाड़ी प्रशिक्षित किए हैं. विवेक मौन्ट्रोज के नेतृत्व में पिछले दिनों बूमरैंग की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा डब्लूबीसी में फ्रांस जाकर भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. विवेक ने यह खेल विधिवत सीख कर पहला भारतीय खिलाड़ी होने का गौरव हासिल किया. उन्हें 2020 में बूमरैंग के लिए काम करने के लिये इंटरनेशनल अवॉर्ड भी दिया गया . उन्होंने भारत देश के कई राज्यों और शहरों में बूमरैंग के बहुत से खिलाड़ी प्रशिक्षित किए हैं. इस खेल के लिए जनजागृति फैलाने के मकसद से ही बूमरैंग एसोसिएशन ने वर्कशॉप का आयोजन इंदौर की सेज यूनिवर्सिटी में किया. इस वर्कशॉप में भारत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी भी मौजूद थे. वर्कशॉप में भारत की ओर से विवेक मोन्ट्रोस, ने छात्रों को बूमरैंग थ्रो करने की तकनीक सिखाई .

इंदौर न्यूज़ डेस्क !!!
 

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