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Haridwar टोल टैक्स के नाम पर भी साइबर क्राइम की आशंका
 

Haridwar टोल टैक्स के नाम पर भी साइबर क्राइम की आशंका


उत्तराखंड न्यूज़ डेस्क,  हरिद्वार में खड़ी कार का पुडुचेरी में टोल टैक्स कटने के मामले में एक्सपर्ट भी हैरान हैं. साइबर क्राइम और सिस्टम डाटा की गलती के कारण ऐसा होने का अनुमान लगाया जा रहा है. लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि इसको लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता भी है. क्योंकि इस तरह के कई मामले सामने आ गए हैं. यह बड़ा स्कैम भी हो सकता है.
शिवालिक नगर में खड़े चौपहिया वाहन का 19 सितंबर को पुडुचेरी में दो बार टोल टैक्स काटा गया. जबकि कार एक सप्ताह में 15 किलोमीटर से अधिक नहीं चलती है. पेटीएम से दो बारी में 75 रुपये कटे थे. अमितोष त्यागी का कहना है उनका वाहन मेरठ से आगे तक नहीं गया है.
ऐसे लगता है फास्टैग
चौपहिया वाहनों में फास्टैग लगाने के लिए वाहन मालिक की आरसी, आधार कार्ड जैसे आवश्यक कागजों की जरूरत होती है. जबकि अमितोष का कहना है उन्होंने 2020 में यह वाहन खरीदा था. जिसमें शोरूम से ही फास्टैग लगाया गया.
सिस्टम डाटा बेस की गलती से गलत ट्रांजेक्शन हो सकता है. शिकायत करने पर रुपये 20 दिन में वापस आ जाएं तो समझ लेना चाहिए की सिस्टम की गलती है. रुपये न आएं तो यह स्कैम हो सकता है. क्योंकि एक डिवाइस इस तरह की भी आ रही है, जो खड़ी गाड़ी का फास्ट टैग फ्रीक्वेंसी पकड़ लेती है और इसकी मदद से कहीं भी टोल दिया जा सकता है, लेकिन इसकी संभावना बेहद कम रहती है.
-सुनील उपाध्याय, साइबर एक्सपर्ट
ऐसे बच सकते हैं
एक्सपर्ट सुनील उपाध्याय का कहना है कि पार्किंग करते वक्त कोशिश की जाए कि फास्ट टैग को छिपाया जाए ऐसा करने से फास्ट टैग क्लोन से बचा जा सकता है. रुपये गलत कटने पर हेल्प लाइन पर शिकायत की जाए. विकास पुंडीर ने बताया कि फास्ट टैग लगाते समय जरूर चेक किया जाए कि आधार नंबर और आरसी के साथ ही खाता नंबर ठीक डला है या नहीं.
कई प्रकरण इस तरह के आ रहे हैं. एनएचएआई की सर्वे की गलती भी निकल रही है. एक टीम लगी है. फास्ट टैग लगाते वक्त भी गलती हो सकती है. कभी फास्ट टैग लगाते हुए आरसी का नंबर दूसरा फीड हो जाता है और खाते के अकाउंट व्यक्ति का फीड हो जाता है.
-विकास पुंडीर, इंस्पेक्टर और एक्सपर्ट

हरिद्वार न्यूज़ डेस्क !!!
 

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