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Gaziabad उम्र का पड़ाव पूरा होने पर बच्चों को सौंप रहे शस्त्रत्त् की विरासत
 

Gaziabad उम्र का पड़ाव पूरा होने पर बच्चों को सौंप रहे शस्त्रत्त् की विरासत


उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क  रजापुर निवासी रामेश्वर शर्मा पुलिस में तैनात थे. सन 1975 में आयोजित एक निशानेबाजी की प्रतियोगिता में उन्हें इनाम स्वरूप एक नाली बंदूक मिली. जिसे उन्होंने अपने लाइसेंस पर अंकित करा लिया. वहअब उम्र के उस पड़ाव पर हैं कि बंदूक थामना काफी मुश्किल है. इनाम के रूप में मिली इस बंदूक की कीमत आज भले ही कुछ ने हो लेकिन इससे जुड़ी भावनाओं को कोई मूल्य नहीं है. लिहाजा रामेश्वर ने अपनी शस्त्रत्त् की यह विरासत अपने बेटे को दी है. उनके बेटा का कहना है कि इस विरासत को संजोकर रखेंगे. केवल रामेश्वर ही नहीं हर माह जिला प्रशासन के पास 50 से ज्यादा विरासत के मामले आ रहे हैं.

गाजियाबाद जिले में 14 हजार से ज्यादा शस्त्रत्त् लाइसेंस धारक हैं. जिलाधिकारी ने नए शस्त्रत्त् लाइसेंस जारी करने पर सख्ती की हुई है. शस्त्रत्त् लाइसेंस की क्यों जरूरत है बिना इसके स्पष्ट हुए नया लाइसेंस जारी नहीं हो रहा है. दूसरी ओर उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंचे बुजुर्ग अपनी शस्त्रत्त् की विरासत अपने बच्चों को सौंप रहे हैं. घर परिवार में जिन बुजुर्ग के पास पहले से शस्त्रत्त् लाइसेंस हैं वह अब इसको अपने बच्चों के नाम करा रहे हैं. इससे बुजुर्गों के पास रखे शस्त्रत्त् की जिम्मेदारी भी समाप्त हो रही है साथ ही बच्चों की शस्त्रत्त् की इच्छा पूरी हो जा रही है.
पुराने से लेकर अंग्रेजी शस्त्रत्त् भी है कारण विरासत के इन लाइसेंस में पुराने व अंग्रेजों के जमाने से विदेशी शस्त्रत्त् भी शामिल है. भले की विदेशी बंदूक की कोई कीमत न हो लेकिन अंग्रेजी रिवाल्वर व पिस्टल की कीमत लाखों रुपये हैं. इसी कारण बुजुर्ग अपने इन शस्त्रत्त् को अपने बच्चों को सौंप रहे हैं.


गाजियाबाद न्यूज़ डेस्क
 

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