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Faizabad राम नाम महामंत्र नहीं बीज मंत्र: मुरारी बापू

जब राम ने चलाया हनुमान पर बाण एक बार श्रीराम ने किसी बात हनुमानजी पर बाण चला दिया। हनुमानजी हाथ जोड़कर सिर्फ राम नाम का जाप करते रहे। राम नाम के प्रभाव से श्रीराम का बाण भी हनुमानजी को छू न सका।
 

उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क  रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में रामकथा के मर्मज्ञ व अन्तर्राष्ट्रीय कथा व्यास संत मोरारी बापू ने दूसरे दिन कथा की शुरुआत पूर्वाह्न दस बजे से शुरू की. उन्होंने कहा कि चारों युगों में राम नाम का प्रभाव रहा है लेकिन कलिकाल में यही नाम ही जीवन का आधार है. उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने राम नाम का आश्रय लेकर कालकूट का विष ग्रहण कर लिया था. उन्होंने कहा कि यह राम नाम महामंत्र ही नहीं बीज मंत्र भी है.
संत प्रवर ने श्रीरामचरितमानस के मंगलाचरण में गोस्वामी तुलसीदास महाराज के द्वारा क्रमश: की गयी वंदना के क्रम में बताया कि गोस्वामी जी ने राम नाम की महिमा का वर्णन 72 पंक्तियों में किया. फिर वह मानते हैं कि राम नाम के प्रभाव को सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता. उसकी महिमा अनंत है. उन्होंने कहा कि राम नाम का आश्रय लेने वाले किसी भी साधक को शाश्वत सम्मान प्राप्त होता है. उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि, गोस्वामी तुलसीदास, संत तुकाराम व संत ज्ञानेश्वर महाराज प्रत्यक्ष उदाहरण है. उन्होंने कहा कि विघ्नहर्ता गणपति प्रथम पूज्य इसलिए हुए कि भूमि पर राम नाम लिखकर परिक्रमा की थी.
वेदों के प्राण है श्री राम, राम तत्व न हो तो वेद भी निष्प्राण है: संत प्रवर बापू ने कहा कि राम वेदों के प्राण है. राम तत्व के बिना वेद भी निष्प्राण है. उन्होंने कहा कि सूर्य, चंद्र व अग्नि के भी कारक राम ही हैं. सूर्यवंश में उत्पन्न होकर उन्होंने सूर्य की महिमा बढ़ाई. राम से जुड़कर चंद्र की भी महिमा बढ़ी और अग्नि से प्रकट होकर उन्होंने अग्नि का भी मान बढ़ाया.


अस्तित्व की व्यवस्था है वक्ता का धरा पर आगमन
संत प्रवर बापू ने ऋषि भारद्वाज के द्वारा अपने संशयों के निवारण के लिए ऋषि याज्ञवल्क्य से रामकथा के विषय में चर्चा को विस्तार देते हुए कहा कि ह्यश्रोता वक्ता ध्यान निधि कथा राम कै गूढ़.. ह्य. उन्होंने कहा कि श्रोता और वक्ता दोनों को ज्ञान निधि होना चाहिए. उन्होंने कहा कि वक्ता अस्तित्व की व्यवस्था से धरा पर अवतरित होते हैं. उन्होंने कहा कि गोस्वामी जी ने मानस के लक्षण गिनाए है. उन्होंने कहा कि श्रोता के चार लक्षणों में पहला समझदारी का होना, हृदय का शुद्ध होना, रामकथा का रसिक होना और भगवान का भक्त होना चाहिए. तभी वह रामकथा को समझकर उसके रस में लीन हो सकता है.


फैजाबाद न्यूज़ डेस्क
 

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