राजस्थान में आदिवासी विकास को नई ऊर्जा: मुख्यमंत्री ने 1,902 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलान्यास किया
राजस्थान में आदिवासी इलाकों के विकास को नई गति देने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बेणेश्वर धाम में बड़ी विकास योजनाओं का शिलान्यास किया है। इन परियोजनाओं की कुल राशि 1,902 करोड़ रुपये है, जो आदिवासी बहुल जिलों में विभिन्न बुनियादी ढांचा और कल्याण कार्यों के लिए खर्च की जाएगी। यह पहल राज्य सरकार की उन कोशिशों को दर्शाती है जिनका उद्देश्य आदिवासी समाज को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाना है।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि आदिवासी समुदाय राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनकी भागीदारी से ही राज्य का वास्तविक विकास संभव है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जीवन स्तर सुधरेगा और जनजातीय युवाओं तथा महिलाओं को नई दिशा मिलेगी।
शिलान्यास कार्यक्रम में कुल 326 विकास कार्यों की घोषणा की गई, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, ग्रामीण बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण योजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं से डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सलूम्बर और सिरोही जैसे जनजातीय इलाकों में व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने आदिवासी परिवारों को वन अधिकार देने के लिए विशेष अभियान शुरू करने की भी घोषणा की। इसके तहत वन क्षेत्र में रहने वाले लाभार्थियों के नाम अधिकार रिकॉर्ड में दर्ज किए जाएंगे, जिससे वे सरकारी योजनाओं और बैंक लोन जैसे संसाधनों का लाभ उठा सकेंगे।
भजनलाल शर्मा ने कहा कि आदिवासी पारंपरिक कला और शिल्प जैसे पिथोरा चित्रकला, बांस बुनाई, मिट्टी के बर्तन और लकड़ी की नक्काशी को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम होगा। इससे स्थानीय कारीगरों को पहचान और उचित मूल्य मिलने में मदद मिलेगी।
राज्य सरकार ने 530 वन धन विकास केंद्र भी स्थापित किए हैं, जो लगभग 1.5 लाख आदिवासी महिलाओं को वन उत्पाद आधारित आजीविका के लिए समर्थन देंगे। यह पहल स्थानीय आय के स्रोत बढ़ाने और महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने का संकेत है।
बीते समय में राजस्थान सरकार ने जनजातीय इलाकों के निवेश और रोजगार अवसर बढ़ाने की कई कोशिशें की हैं, जिनमें पर्यटन विकास, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार योजनाएं शामिल हैं। बेणेश्वर धाम जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक केन्द्रों को जोड़कर ट्राइबल टूरिज़्म सर्किट के विस्तार की योजना भी प्रस्तावित है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इन कार्यों से आदिवासी क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित होगा और यह विकास केवल सड़कों, भवनों या परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार देखने को मिलेगा। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद ग्रामीण तथा आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन और कला‑संस्कृति के क्षेत्र में नई उम्मीदों के दरवाज़े खुलेंगे।

