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Dehradun पहाड़ की हवाई पट्टियां तीस साल पहले बनीं, विमान कब उड़ेंगे? गौचर में जहाज के बजाय लैंड कर रहे हैं हेलीकाप्टर
 

Dehradun पहाड़ की हवाई पट्टियां तीस साल पहले बनीं, विमान कब उड़ेंगे? गौचर में जहाज के बजाय लैंड कर रहे हैं हेलीकाप्टर

उत्तराखंड न्यूज़ डेस्क, संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होने जा रहा है. एक फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी. इस बजट को लेकर उत्तराखंड को केंद्र से बड़ी उम्मीदें हैं.
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में तीस साल पहले हवाई पट्टियां बनाई गई थीं, लेकिन नियमित विमान सेवाएं आज तक शुरू नहीं हो पाई हैं. पिथौरागढ़ की नैनी सैनी हवाई पट्टी से कुछ समय तक सस्ती हवाईसेवा शुरू हुई, लेकिन कुछ ही समय में बंद हो गई. चिन्यालीसौड़ गौचर से विमान सेवा शुरू ही नहीं हो सकीं, जो हेलीकाप्टर सेवाएं चलाईं गई, वह इतनी महंगी हैं कि सवारी नहीं मिलने के कारण ठप हो गईं. दरअसल, उत्तराखंड में यूपी के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में बनी गौचर, चिन्यालीसौड़ और नैनी सैनी हवाई पट्टियों पर अब तक जहाज नहीं उतर पाए हैं. सामरिक लिहाज से तीनों ही हवाई पट्टियों को बड़ा महत्व है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस कोई भी सरकारें इन हवाई पट्टियों के दिन नहीं बहुरा पाए हैं. इनमें नियमित विमान सेवा शुरू होने से राज्य की पर्यटन गतिविधियों को जहां बढ़ावा मिलेगा, वहीं स्थानीय लोगों की आर्थिकी भी बढ़ेगी. जौलीग्रांट और पंतनगर एयरपोर्ट का विस्तार भी लंबित है. उत्तराखंड के लोग दशकों से इन हवाई पट्टियों पर नियमित तौर पर विमान सेवा की राह ताक रहे हैं. अब फिर वे उम्मीदें लगाए हैं कि इस बजट में इन हवाई पट्टियों के लिए कुछ खास होगा.

चिन्यालीसौड़ में विमान उतरने का सपना अधूरा
चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी के लिए वर्ष 1992 में अधिग्रहण और 93 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था. लेकिन वर्ष 2016 में यह हवाई पट्टी प्रारंम्भिक तौर पर तैयार हो गई थी. इसके बाद वर्ष 2018 में इसमें वायुसेना ने एएन-32 मल्टीपर्पज विमान ने लैंड किया और बाद में वायु सेना का हरक्यूलस भी कई बार उतरा, लेकिन जनता के लिए विमान सेवा शुरू नहीं हो पाई.
पिथौरागढ़ में लोगों ने पहली बार 1994 में देखा था विमान
नैनीसैनी हवाई पट्टी पर वर्ष 1991 में निर्माण शुरू हुआ. वर्ष 1994 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने नैनीसैनी एयरपोर्ट का शुभारंभ किया. तब वे 20 सीटर विमान से यहां पहुंचे थे और तब ही लोगों ने पहली बार विमान देखा था. राज्य बनने के करीब 15 साल बाद जनवरी, 2016 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नौ सीटर विमान की सफल ट्रायल लैंडिग की. सत्ता परिवर्तन के बाद वर्ष 2018 में एयरपोर्ट में ट्रैफिक कंट्रोल, फायरब्रिगेड, सुरक्षा व्यवस्था मुकम्मल कर टर्मिनल भवन में टिकट बुकिंग काउंटर स्थापित किया गया. 17 जनवरी, 2019 को नैनीसैनी से देहरादून और पंतनगर के लिए नौ सीटर विमान सेवा शुरू की लेकिन मार्च 2020 में रनवे में विमान फिसलने के बाद से सेवा ठप हो गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि विमान सेवा शुरू होती तो यहां पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलता.
गौचर हवाई पट्टी के लिए 90 के दशक में किसानों से 509 नाली भूमि ली गई थी. वर्ष 1996 में यहां 1450 मीटर लंबी हवाई पट्टी का निर्माण शुरू किया गया और साल 2000 में बनकर हवाई पट्टी तैयार हुई. लेकिन यहां से हवाई जहाज उड़ान भरे यह सपना अब तक पूरा नहीं हो पाया. बुजुर्ग समाज सेवी ललिता प्रसाद लखेड़ा बताते हैं कि किसानों की करोड़ों की जमीन को औने- पौने दामों पर लेकर सरकारें महज हैलीकॉप्टर का संचालन कर रही हैं. गौचर के पूर्व राजस्व उपनिरीक्षक जगदीश ओलिया का कहना है कि शासन ने इस हवाई पट्टी के विस्तार की कार्ययोजना मांगी गई थी, जिसका प्रस्ताव काफी पहले भेजा जा चुका है.

देहरादून न्यूज़ डेस्क !!!
 

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