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दौसा के झूथाहेडा खुर्द में महिला पहलवान गुंजन ने पुरुष पहलवान को हराकर जीता सबका दिल

दौसा के झूथाहेडा खुर्द में महिला पहलवान गुंजन ने पुरुष पहलवान को हराकर जीता सबका दिल

राजस्थान के दौसा जिले के बैजूपाड़ा इलाके में स्थित ग्राम झूथाहेडा खुर्द में रविवार को आयोजित भौमिया बाबा परिसर में कुश्ती दंगल का आयोजन हुआ, जो इस बार दर्शकों के लिए रोमांचक और यादगार साबित हुआ। इस दंगल में अलवर जिले की महिला पहलवान गुंजन ने पुरुष पहलवान को हराकर न केवल जीत हासिल की बल्कि सबको चौंका भी दिया।

दंगल के दौरान आमिर खान की फिल्म 'दंगल' की याद दिलाने वाली यह घटना देखी गई, जब गीता और बबीता फोगाट की तरह गुंजन ने पुरुष पहलवान आगरा के कमलेश को जोरदार मुकाबले के बाद मात दी। मुकाबला बेहद रोमांचक था और दर्शक हर पल की जीत का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जब गुंजन ने कमलेश को हराया, तो पूरी स्टेडियम तालियों और जयकारों से गूंज उठा। दर्शकों ने खड़े होकर महिला पहलवान को सम्मानित किया और उनके साहस, शक्ति और तकनीक की जमकर सराहना की।

दंगल में भाग लेने वाले पहलवानों ने भी गुंजन की इस उपलब्धि को प्रेरणादायक बताया। प्रतियोगिता में महिला पहलवान का पुरुष पहलवान को हराना नए सिरे से इस खेल में लैंगिक समानता और महिलाओं की ताकत को प्रदर्शित करता है। आयोजकों ने बताया कि यह घटना स्थानीय खेल और महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

गुंजन को इस शानदार जीत के लिए 2100 रुपए का नकद पुरस्कार भी दिया गया। पुरस्कार वितरण के दौरान आयोजकों ने कहा कि ऐसे इवेंट्स में युवा और खासकर महिलाएं खेलों में अपने हुनर और मेहनत को दिखा सकती हैं। इस जीत के बाद गुंजन का नाम न केवल दौसा बल्कि आसपास के जिलों में भी चर्चा का विषय बन गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गुंजन की इस उपलब्धि ने युवाओं में खेलों के प्रति उत्साह और महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाया है। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलता है बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी मजबूत संदेश जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जीत से आने वाले समय में अधिक महिलाएं पुरुषों के मुकाबलों में भी अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रेरित होंगी। गुंजन ने साबित कर दिया कि अगर मेहनत और धैर्य हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

दौसा के झूथाहेडा खुर्द में आयोजित यह कुश्ती दंगल सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं था, बल्कि यह स्थानीय समाज और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। गुंजन की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में महिला पहलवानों के लिए एक मिसाल के रूप में याद रखी जाएगी।

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