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वीडियो में देंखे चूरू में भागवत कथा के दौरान राजेंद्र राठौड़ ने जमकर झूमकर भजन पर किया नृत्य

वीडियो में देंखे चूरू में भागवत कथा के दौरान राजेंद्र राठौड़ ने जमकर झूमकर भजन पर किया नृत्य

चूरू जिले के सरदारशहर के हरपालसर गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा और नानी बाई का मायरा कार्यक्रम में गुरुवार को पूर्व नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने मंच पर जमकर भजन पर नृत्य किया।

कार्यक्रम शिव गोशाला में आयोजित किया गया, जिसमें ऋषिकेश से आए बाल संत भोले बाबा कथा सुना रहे हैं। कथा के छठे दिन, गुरुवार को सीकर के रुपनसर से आए संत गुलाब नाथ जी महाराज ने ‘कान्हों बैठो कदम केरी डालिये’ भजन प्रस्तुत किया। भजन की मधुर धुन और भक्तिमय माहौल में मंच पर बैठे राजेंद्र राठौड़ झूमने लगे।

कार्यक्रम में धार्मिक और सामाजिक समर्पण का भी संदेश देखने को मिला। राजेंद्र राठौड़ ने शिव गोशाला और कार्यक्रम के लिए दान और सहयोग की भूमिका निभाई। उन्होंने और अन्य दानदाताओं ने इस धार्मिक आयोजन में करोड़ों रुपए का योगदान दिया।

राजेंद्र राठौड़ ने कहा, “गौ सेवा के लिए दिया गया दान कभी व्यर्थ नहीं जाता। गाय माता के आशीर्वाद से धन में वृद्धि होती है और समाज में सकारात्मक ऊर्जा आती है। यह राशि सीधे गायों के हित और संरक्षण में इस्तेमाल की जाएगी।”

कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीण और श्रद्धालु इस आयोजन में भक्ति और उत्साह के मिश्रण का आनंद ले रहे थे। संत गुलाब नाथ जी महाराज के भजन और कथा ने सभी की आत्मा को भावविभोर कर दिया।

विशेष रूप से यह आयोजन पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की धार्मिक भक्ति और समाज सेवा की छवि को और मजबूत करता है। उनके दान और सक्रिय भागीदारी से स्थानीय लोगों में धार्मिक उत्साह और जागरूकता बढ़ रही है।

कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मकता, नैतिकता और सामूहिक भक्ति की भावना को बढ़ावा देना है। इसमें युवाओं और बच्चों की भागीदारी भी जोरदार रही, जो धार्मिक शिक्षाओं से प्रेरित होकर समाज में योगदान देने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

कुल मिलाकर, हरपालसर गांव में चल रही श्रीमद् भागवत कथा और नानी बाई का मायरा कार्यक्रम धार्मिक भक्ति, समाज सेवा और संस्कृति का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत कर रहा है। राजेंद्र राठौड़ का मंच पर झूमते हुए भजन पर नृत्य और दान इस आयोजन की खास झलक साबित हुआ। इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ाते हैं बल्कि स्थानीय समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सामूहिक सहभागिता को भी बढ़ावा देते हैं।

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