चित्तौड़गढ़ में मेवाड़ यूनिवर्सिटी के बीएससी नर्सिंग कोर्स की मान्यता विवाद ने नया मोड़ लिया, छात्र माइग्रेशन पर अड़े
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी के बीएससी नर्सिंग कोर्स की मान्यता को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले करीब एक महीने से छात्र प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे हैं और अब मामला नए मोड़ पर पहुंच गया है।
छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी के कोर्स की मान्यता विवादित होने के कारण उनका शैक्षणिक भविष्य खतरे में है। यही वजह है कि वे अब किसी अन्य मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी में माइग्रेशन की मांग पर अड़ गए हैं। छात्रों का आरोप है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई, तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
स्थानीय शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नर्सिंग और अन्य स्वास्थ्य विज्ञान के कोर्सों में मान्यता का होना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके आधार पर छात्र पेशेवर योग्यता और भविष्य की नौकरी तय होती है। मान्यता विवाद होने पर छात्रों की डिग्री की वैधता और करियर पर सीधे असर पड़ सकता है।
मेवाड़ यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि वे छात्रों की चिंता को गंभीरता से ले रहे हैं और मान्यता संबंधी प्रक्रिया उच्च शिक्षा विभाग और नर्सिंग काउंसिल के निर्देशों के अनुसार पूरी की जा रही है। यूनिवर्सिटी ने छात्रों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में आएं।
वहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि वे मान्यता और माइग्रेशन संबंधी सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि छात्र आंदोलन को अत्यधिक रूप से तेज करते हैं, तो विश्वविद्यालय और प्रशासन द्वारा सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी छात्रों के अधिकार और भविष्य को सुरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि छात्रों को न्याय और शिक्षा की गारंटी मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें अपनी पढ़ाई और करियर की चिंता न हो।
इस विवाद का अगला चरण इस महीने के अंत तक तय होने की संभावना है, जब विभाग और यूनिवर्सिटी प्रशासन छात्रों की मांगों पर चर्चा करेंगे। छात्रों की मांग पर यूनिवर्सिटी में माइग्रेशन नीति स्पष्ट करना और वैकल्पिक उपाय सुझाना मुख्य मुद्दा बन गया है।
इस तरह चित्तौड़गढ़ में मेवाड़ यूनिवर्सिटी का बीएससी नर्सिंग कोर्स विवाद शैक्षणिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है, और जल्द ही इसका समाधान निकाले जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

