Samachar Nama
×

श्री सांवलियाजी मंदिर में भंडार की काउंटिंग पूरी, नकद व ऑनलाइन चढ़ावे से 35.40 करोड़ की आय

श्री सांवलियाजी मंदिर में भंडार की काउंटिंग पूरी, नकद व ऑनलाइन चढ़ावे से 35.40 करोड़ की आय

मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवलियाजी मंदिर में भंडार की छह राउंड में काउंटिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। शुक्रवार को अंतिम राउंड की काउंटिंग संपन्न होने के साथ ही चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस बार मंदिर भंडार से नकद और ऑनलाइन चढ़ावे को मिलाकर कुल 35 करोड़ 40 लाख 93 हजार 313 रुपए की प्राप्ति हुई है। यह राशि भंडार से मिले कैश के साथ-साथ ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, मनी ऑर्डर और चेक के माध्यम से प्राप्त चढ़ावे को शामिल करती है।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, भंडार की काउंटिंग पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था के बीच की गई। छह चरणों में चली इस प्रक्रिया के दौरान प्रशासन, मंदिर मंडल के सदस्य और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और चढ़ावे की मात्रा को देखते हुए काउंटिंग में विशेष सावधानी बरती गई।

मंदिर मंडल के सदस्य पवन तिवारी ने बताया कि सोने और चांदी के भाव रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि भगवान सांवरा सेठ पर लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है और यही वजह है कि महंगाई और ऊंचे धातु मूल्यों के बावजूद श्रद्धालु खुलकर दान कर रहे हैं।

इस बार श्री सांवलियाजी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा करीब 90 लाख रुपए मूल्य का सोना और लगभग 2 करोड़ 80 लाख रुपए की चांदी अर्पित की गई है। इस तरह सोना-चांदी की कुल भेंट करीब 3 करोड़ 70 लाख रुपए आंकी गई है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, इनमें आभूषण, सिक्के और अन्य बहुमूल्य धातुएं शामिल हैं, जिन्हें विधिवत रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि डिजिटल माध्यमों से होने वाले दान में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऑनलाइन चढ़ावे की सुविधा के चलते देश-विदेश से श्रद्धालु भगवान सांवरा सेठ को अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि श्रद्धालुओं को भी सुविधा मिली है।

श्री सांवलियाजी मंदिर को राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर में “मेवाड़ का धनकुबेर” कहा जाता है। हर महीने यहां भंडार खोला जाता है और हर बार करोड़ों की आय होती है। इस बार की आय को भी बीते रिकॉर्ड्स के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मंदिर मंडल के अनुसार, भंडार से प्राप्त राशि का उपयोग धार्मिक कार्यों, मंदिर के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सामाजिक सेवा के कार्यों में किया जाएगा। मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए भी इस राशि का एक बड़ा हिस्सा खर्च किया जाएगा।

कुल मिलाकर, श्री सांवलियाजी मंदिर में हुई इस बार की भंडार काउंटिंग ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि श्रद्धालुओं की आस्था अटूट है और भगवान सांवरा सेठ पर विश्वास लगातार और मजबूत होता जा रहा है।

Share this story

Tags