असम में ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से चित्तौड़गढ़ के जवान की मौत, वीडियो में जाने 25 दिन बाद मिलनी थी पदोन्नति; पत्नी वर्दी लेकर रो पड़ीं
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के सेना के हवलदार जितेंद्र सिंह का असम में ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से निधन हो गया। शुक्रवार को उनकी पार्थिव देह गंगरार क्षेत्र के पैतृक गांव सूरत सिंह जी का खेड़ा लाई गई, जहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। जवान को अंतिम विदाई देते समय गांव में शोक का माहौल रहा। पिता बेटे का शव देखकर बिलख पड़े, वहीं पत्नी श्याम कंवर हाथ में पति की वर्दी लेकर रोने लगीं। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
बेटी और छोटे भाई ने दी मुखाग्नि
हवलदार जितेंद्र सिंह की पार्थिव देह गांव पहुंचने पर परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जवान की 13 वर्षीय बेटी कीर्तिराज और छोटे भाई ललित सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी।अपने पिता को अंतिम विदाई देती बेटी और बेटे को खोने के गम में डूबे परिवार को देखकर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए। पिता रघुवीर सिंह बेटे का शव देखकर खुद को संभाल नहीं पाए और बिलख पड़े। गांव में शोक की लहर छा गई।
पत्नी को सौंपी गई पति की वर्दी
अंतिम संस्कार के दौरान सेना के अधिकारियों ने जवान की पत्नी श्याम कंवर, बड़ी बेटी कीर्तिराज और एक साल की बेटी सौम्या को वर्दी सौंपी। पति की वर्दी हाथों में लेते ही पत्नी श्याम कंवर फूट-फूटकर रोने लगीं। परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक कर देने वाला था।एक तरफ परिवार अपने प्रिय सदस्य को खोने के गम में डूबा था, तो दूसरी तरफ जवान की देश सेवा और सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई ने मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
25 दिन बाद मिलनी थी पदोन्नति
सेना के अनुसार, हवलदार जितेंद्र सिंह को 1 नवंबर को नायब सूबेदार के पद पर पदोन्नति मिलने वाली थी। लेकिन इससे करीब 25 दिन पहले ही असम में ड्यूटी के दौरान कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हो गया।पदोन्नति से कुछ दिन पहले ही जवान की मौत की खबर ने परिवार और परिचितों को गहरे सदमे में डाल दिया। परिवार के लिए यह क्षति ऐसी है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
पीछे छोड़ गए पत्नी और दो बेटियां
हवलदार जितेंद्र सिंह अपने पीछे पत्नी श्याम कंवर और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। बड़ी बेटी कीर्तिराज 13 साल की है, जबकि छोटी बेटी सौम्या की उम्र महज एक साल है। परिवार के लिए यह दुख और भी गहरा है कि छोटी बेटी अभी पिता के स्नेह को ठीक से समझने की उम्र में भी नहीं पहुंची है।जितेंद्र सिंह ने देश की सेवा करते हुए अपना जीवन समर्पित किया। शुक्रवार को सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनके निधन से परिवार, गांव और क्षेत्र में शोक का माहौल है।

