चंडीगढ़ में डिलीवरी एजेंट का वीडियो वायरल, ‘ज़ॉम्बी ड्रग’ को लेकर उठी चिंता
देश में कथित ‘ज़ॉम्बी ड्रग’ को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। यह मामला तब सामने आया जब चंडीगढ़ में एक ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म Blinkit के एक डिलीवरी एजेंट का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह कथित तौर पर करीब 2 घंटे तक एक ही जगह बिना हिले-डुले खड़ा दिखाई दिया।
वायरल वीडियो के सामने आने के बाद लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है और कई यूजर्स ने सवाल उठाए हैं कि क्या भारत में ‘ज़ॉम्बी ड्रग’ जैसे खतरनाक पदार्थ की मौजूदगी हो सकती है। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि अब तक इस मामले में किसी आधिकारिक पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।
What is happening here?
— Woke Eminent (@WokePandemic) March 25, 2026
A disturbing incident in Chandigarh’s Sector 33B has left residents alarmed after a Blinkit delivery worker was seen standing completely still for nearly two hours. Eyewitnesses reported that the man appeared unresponsive, staring blankly in one… pic.twitter.com/19aeXDVVmQ
स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि डिलीवरी एजेंट का इस तरह बिना हिले-डुले लंबे समय तक खड़ा रहना असामान्य है, जिससे इस घटना ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कुछ लोग इसे थकान या स्वास्थ्य समस्या से भी जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कई लोग इसे नशीले पदार्थों के संभावित प्रभाव के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी जांच और मेडिकल रिपोर्ट जरूरी होती है। केवल वायरल वीडियो के आधार पर किसी भी तरह के नशीले पदार्थ या ‘ज़ॉम्बी ड्रग’ की पुष्टि नहीं की जा सकती। इस तरह की घटनाओं में वास्तविक कारण अलग भी हो सकते हैं, जैसे अत्यधिक थकान, लो ब्लड प्रेशर या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं।
फिलहाल, इस मामले को लेकर संबंधित एजेंसियों की ओर से जांच की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन वायरल वीडियो ने लोगों के बीच जागरूकता और चिंता दोनों को बढ़ा दिया है।
सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से फैल रहा है और यूजर्स इस पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग सरकार और प्रशासन से इस मामले की जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी भी तरह की अफवाहों पर विराम लगाया जा सके।
यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट को बिना जांचे-परखे सच मान लेना सही नहीं होता। ऐसे मामलों में सही जानकारी और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना ही समझदारी है।

