छत्तीसगढ़ न्यूज़ डेस्क, प्रभु दर्शन भवन टिकरापारा मे दादी जानकी के निमित्त परमात्मा को भोग स्वीकार कराया गया। मंजू दीदी ने कहा कि दादी के महावाक्य आज भी स्मृति में ऐसे बसे हैं कि लगता ही नहीं कि उन्हें अव्यक्त हुए चार वर्ष हो गए। आज भी दादियां सूक्ष्म रूप मेंे उपस्थिति का अनुभव कराती है। जानकी दादी दिल की सच्चाई, सफाई और सादगी की जीती जागती मूर्ति थीं।
योगबल से शरीर के कर्मभोग चुकतू कर कर्मातीत स्थिति का अनुभव करते यज्ञ मेंे सबसे लंबी आयु तक सेवा देने वाली अथक सेवाधारी की मिसाल बनीं। परमात्मा कहते हैं जब आत्मा स्वस्थ है तब तन का रोग कष्ट का अनुभव नहीं कराते। आत्मिक शक्ति के आधार पर सदा स्वस्थ और संतुष्ट जीवन का अनुभव राजयोग से संभव है। यही शिक्षा दादी जानकी ने विश्व को दिया। अंत मे सभी को भोग वितरण किया गया।
बिलासपुर न्यूज़ डेस्क!!!