बीकानेर की 7 नगरीय निकायों में बदली वोटिंग की तारीख, फुटेज में देंखे मेले-त्योहार और धार्मिक यात्राओं को देखते हुए फैसला
राजस्थान के बीकानेर जिले की सभी 7 नगरीय निकायों में होने वाली वोटिंग की तारीख में बदलाव किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी की सिफारिश के बाद मतदान की निर्धारित तारीख में संशोधन किया है। यह फैसला क्षेत्र में आयोजित होने वाले विभिन्न मेलों, तीज-त्योहारों, धार्मिक यात्राओं और सामाजिक संगठनों की मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से राज्य निर्वाचन आयोग को मतदान की तारीख बदलने का प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें बताया गया कि निर्धारित मतदान तिथि के आसपास जिले के अलग-अलग हिस्सों में कई धार्मिक और सामाजिक आयोजन होने हैं। इसके चलते मतदाताओं के साथ-साथ मतदान प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सामाजिक संगठनों ने की थी तारीख बदलने की मांग
बीकानेर जिले में विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से भी मतदान की तारीख में बदलाव की मांग की गई थी। संगठनों ने आयोग को बताया कि मतदान की तारीख के आसपास कई महत्वपूर्ण मेले और तीज-त्योहार आयोजित होने वाले हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग धार्मिक यात्राओं में शामिल होने के लिए बाहर जा सकते हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी ने राज्य निर्वाचन आयोग से मतदान की तारीख में बदलाव की सिफारिश की। आयोग ने मामले पर विचार करने के बाद बीकानेर जिले की सभी सात नगरीय निकायों के लिए मतदान कार्यक्रम में संशोधन करने का फैसला किया।
मतदाताओं की भागीदारी पर भी असर की आशंका
चुनाव की तारीख धार्मिक आयोजनों और स्थानीय मेलों के साथ पड़ने पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के अपने क्षेत्र से बाहर रहने की संभावना थी। ऐसे में मतदान प्रतिशत प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई थी। आयोग के फैसले से अब मतदाताओं को मतदान में भाग लेने के लिए बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।
बीकानेर जिले की सभी सात नगरीय निकायों में चुनावी प्रक्रिया के तहत मतदान कराया जाना है। तारीख में बदलाव के बाद संबंधित अधिकारियों को संशोधित कार्यक्रम के अनुसार तैयारियां करने के निर्देश दिए जाएंगे।राज्य निर्वाचन आयोग के इस निर्णय के बाद अब उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को भी अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव करना होगा। वहीं, प्रशासन के सामने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान कराने की तैयारियों को नए कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ाने की चुनौती होगी।

