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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाक सीमा पर दहशत! 20 KM दूर तक गूंजे धमाके, ग्रामीणों ने बताई रातभर कांपती ज़मीन की कहानी

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाक सीमा पर दहशत! 20 KM दूर तक गूंजे धमाके, ग्रामीणों ने बताई रातभर कांपती ज़मीन की कहानी

मंगलवार देर रात सीमा पार गूंजे धमाकों की आवाज पश्चिमी सीमा से सटे खाजूवाला, बज्जू क्षेत्र के गांवों में साफ सुनाई दी। ग्रामीणों के लिए यह पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए सायरन की तरह था। बुधवार सुबह जब पत्रिका टीम सीमा क्षेत्र में पहुंची तो ग्रामीणों के चेहरे खुशी से चमक रहे थे। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले इन ग्रामीणों ने सीमा पार आतंकियों के ठिकानों पर भारतीय जवाबी कार्रवाई को सबसे पहले महसूस किया।पाकिस्तान का बहावलपुर इस क्षेत्र से करीब 80 किमी दूर ही है। ऑपरेशन सिंदूर के तहत विस्फोटकों की गूंज भारतीय सीमा में करीब 20 किमी अंदर तक सुनी जा सकती थी। ऐसा लग रहा था जैसे आसमान में रोशनी चमक रही हो। सीमावर्ती गांव आनंदगढ़, अलाउद्दीन, 30, 33 व 34 केवाईडी, कालूवाला के ग्रामीण घरों से बाहर निकल आए और पूरी रात जश्न मनाया। सुबह बोले- अगर पाकिस्तान से युद्ध हुआ तो सेना के सारथी बनकर लड़ेंगे। 

डर नहीं था, सिर्फ गर्व था
फतूवाला, रणजीतपुरा, गोडू जैसे गांवों में रहने वाले ग्रामीणों ने बताया कि वे सीमा के नजदीक हैं। उन्हें इसका बिल्कुल भी डर नहीं है। अगर युद्ध होता है तो वे सेना की मदद करने में गर्व महसूस करेंगे। फतूवाला के चौगान में खेजड़ी के पेड़ पर बैठे बज्जू प्रधान भागीरथ तेतरवाल कहते हैं कि ग्रामीणों को खुद पर और सेना पर पूरा भरोसा है। इसीलिए बीती रात डर नहीं था, सिर्फ गर्व था।

सैन्य बंकरों की रखवाली कर रहे बच्चे
सीमा से कुछ दूरी पर टीलों के बीच सैन्य बंकर के पास कुछ बच्चे नजर आए। नजदीक जाकर देखा तो उनका उत्साह देखकर सीना गर्व से चौड़ा हो गया। बुधवार को स्कूल बंद होने के बाद 12-13 साल के बच्चे बंकर की रखवाली करने यहां आए थे। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान हमले की धमकी देता है। हाथ में डंडा दिखाते हुए कहा, अगर कोई यहां आया तो हम पीटकर भगा देंगे। बच्चों ने लोहे की मोटी चादरों से बने बंकर की सफाई भी की थी। बुजुर्गों के साहस की कहानी..

फतूवाला में पेड़ के नीचे बैठे 82 वर्षीय शिवनाथराम बिश्नोई युवाओं को 1965 व 1971 के युद्ध की कहानियां सुनाकर प्रेरणा दे रहे थे। उन्होंने कहा- उस समय सेना के जवानों के लिए घरों से बर्तनों में दूध, दही, मक्खन मोर्चों पर ले जाया जाता था। कुओं से पानी लाया जाता था और ऊंटों पर सामान सैनिकों तक पहुंचाया जाता था। ग्रामीण पंचाराम, सुखराम सेठ, जीवनराम मांझू, जोराराम ने बताया, युद्ध के दौरान हमने रेत के टीलों में गाइड के रूप में भारतीय सेना की मदद की थी। हम अब भी तैयार हैं।

सामाजिक संगठनों की टीम सक्रिय
बीकानेर में जिला प्रशासन के अधिकारी व नागरिक सुरक्षा टीम बुधवार को मॉक ड्रिल के जरिए लोगों को प्रशिक्षित करने में जुटी रही। सीमावर्ती गांवों में सीमा जन कल्याण समिति समेत कई संगठन सक्रिय मिले। खाजूवाला क्षेत्र में स्वयंसेवक मंगलवार रात से ही ग्रामीणों को नागरिक सुरक्षा, ब्लैकआउट व आपात स्थिति में बचाव के बारे में बता रहे हैं।

स्वास्थ्य मोर्चा भी तैयार, युद्धकाल जैसा अलर्ट
बीकानेर. सीमा पर बड़ी ताकत से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद अब देश के अंदर भी हर मोर्चे पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल को आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह अलर्ट और सक्रिय कर दिया गया है। युद्धकालीन आपात स्थिति के संभावित प्रभाव को देखते हुए चिकित्सा प्रशासन मंगलवार रात से ही अलर्ट मोड पर है।

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