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बीकानेर में अंतरराष्ट्रीय ऊंट महोत्सव शुरू, ‘पागी’ की परंपरा की रोचक कहानी बनी आकर्षण का केंद्र

बीकानेर में अंतरराष्ट्रीय ऊंट महोत्सव शुरू, ‘पागी’ की परंपरा की रोचक कहानी बनी आकर्षण का केंद्र

राजस्थान के बीकानेर शहर में अंतरराष्ट्रीय ऊंट महोत्सव का आगाज हो चुका है। इस महोत्सव में केवल ऊंटों का प्रदर्शन ही नहीं है, बल्कि बीकानेर की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रदर्शित किया जा रहा है। इनमें सबसे रोचक कहानी है ‘पागी’ की परंपरा की, जिसने हजारों दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

बीकानेर की लोक परंपरा के अनुसार, ‘पागी’ वह व्यक्ति होता था, जो ऊंटों के पैर के निशान को देखकर गुमशुदा ऊंटों को खोज निकालता था। यह कला सदियों से चली आ रही है और ऊंटपालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। पागी को ऊंटों की आदतों और उनके चलने के पैटर्न की गहरी समझ होती थी, जिससे वह आसानी से गुमशुदा ऊंटों को ढूंढ सकता था।

महोत्सव में पागियों की इस कला का प्रदर्शन भी किया गया। दर्शकों ने देखा कि कैसे पागी ऊंटों के पैरों के निशान देखकर उन्हें सुरक्षित स्थान तक लौटाते थे। स्थानीय कलाकारों ने इस परंपरा को जीवंत बनाने के लिए नाट्य और गीतमय प्रस्तुति भी दी, जिससे महोत्सव में रोमांच और उत्साह बढ़ गया।

अंतरराष्ट्रीय ऊंट महोत्सव में ऊंटों की विभिन्न प्रजातियों का प्रदर्शन, ऊंट सवारी प्रतियोगिता, ऊंटों की दौड़ और ग्रामीण हस्तशिल्प का प्रदर्शन किया जा रहा है। इस महोत्सव में भारत के अलावा अन्य देशों के पर्यटक भी शामिल हैं, जिन्होंने ऊंटों और राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का आनंद लिया।

बीकानेर पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य केवल ऊंटों को प्रदर्शित करना नहीं है, बल्कि स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना भी है। उन्होंने कहा कि पागी जैसी परंपराएं युवा पीढ़ी को राजस्थान की लोक संस्कृति से जोड़ती हैं और उन्हें प्रकृति और पशुपालन के महत्व के बारे में जागरूक करती हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पागियों की परंपरा ऊंटपालकों के लिए जीवनदायिनी रही है। ऊंट व्यापार और कृषि से जुड़े लोगों के लिए गुमशुदा ऊंटों की खोज में पागियों की मदद अमूल्य मानी जाती थी। महोत्सव में इस परंपरा का प्रदर्शन युवा पीढ़ी के लिए शिक्षाप्रद और मनोरंजक अनुभव साबित हुआ।

महोत्सव के आयोजकों ने बताया कि अगले कुछ दिनों तक यह महोत्सव चलेगा, जिसमें ऊंटों से जुड़े प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लोक नृत्य और गीतों की भरमार रहेगी। पर्यटक और स्थानीय लोग दोनों ही इन कार्यक्रमों का आनंद ले सकते हैं।

इस तरह, बीकानेर का अंतरराष्ट्रीय ऊंट महोत्सव न केवल पर्यटन और मनोरंजन का केंद्र बन गया है, बल्कि स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का भी कार्य कर रहा है। ‘पागी’ की कहानी और उनकी अद्भुत कला इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण बन गई है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक बीकानेर पहुंच रहे हैं।

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