बीकानेर के कैंसर अस्पताल की मुफ्त दवा दिल्ली के ब्लैक मार्केट में मिली, फुटेज में देंखे j1 लाख से ज्यादा कीमत के 22 इंजेक्शन बरामद
बीकानेर के आचार्य तुलसी रीजनल रिसर्च कैंसर इंस्टीट्यूट में गंभीर कैंसर मरीजों के लिए सरकारी सप्लाई के तहत निशुल्क उपलब्ध कराए जाने वाले महंगे इंजेक्शन के ब्लैक मार्केट में पहुंचने का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने मंगलवार को कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 22 वायल महंगे कैंसर इंजेक्शन बरामद किए हैं। इनमें से कुछ इंजेक्शन राजस्थान के बीकानेर स्थित सरकारी कैंसर अस्पताल के लिए भेजे गए थे।
पुलिस के अनुसार बरामद किए गए इंजेक्शनों में बावेंसियो यानी Bavencio 200 एमजी/10 एमएल शामिल है। इसमें एवेलुमैब नामक दवा होती है, जिसका इस्तेमाल कैंसर के गंभीर मरीजों के इलाज में किया जाता है। एक वायल की कीमत करीब एक लाख रुपये या इससे भी ज्यादा बताई जा रही है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में मरीजों के लिए निशुल्क उपलब्ध कराए जाने वाले इन महंगे इंजेक्शनों का ब्लैक मार्केट में पहुंचना गंभीर मामला माना जा रहा है।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद सामने आया कि बरामद 22 वायल में से चार वायल बीकानेर में सप्लाई किए गए थे। ये इंजेक्शन राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी RMSCL की ओर से सरकारी सप्लाई के तहत बीकानेर भेजे गए थे। इनका इस्तेमाल आचार्य तुलसी रीजनल रिसर्च कैंसर इंस्टीट्यूट और पीबीएम अस्पताल से जुड़े कैंसर उपचार में किया जाना था।
सरकारी सप्लाई की दवा दिल्ली के ब्लैक मार्केट तक कैसे पहुंची, अब इसकी जांच की जा रही है। इस खुलासे के बाद RMSCL के अधिकारियों से लेकर बीकानेर के पीबीएम अस्पताल से जुड़े डॉक्टरों और कर्मचारियों में भी हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अस्पताल के लिए भेजे गए इंजेक्शन किन परिस्थितियों में सरकारी सप्लाई चैन से बाहर निकले और दिल्ली तक कैसे पहुंचे।
दिल्ली पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ कर यह जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है कि कैंसर के इन महंगे इंजेक्शनों की खरीद और बिक्री में कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि सरकारी अस्पतालों के लिए निशुल्क भेजी जाने वाली दवाओं को ब्लैक मार्केट में बेचने का नेटवर्क कितना बड़ा है।
इस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि बरामद दवाओं में से चार वायल बीकानेर के लिए सरकारी सप्लाई में भेजे गए थे। कैंसर के गंभीर मरीजों के लिए ये दवाएं बेहद महत्वपूर्ण होती हैं और इनकी कीमत भी काफी अधिक है। ऐसे में सरकारी योजना के तहत मरीजों को निशुल्क मिलने वाली दवा का बाजार में पहुंचना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जांच के दौरान पुलिस और संबंधित विभाग अब सप्लाई रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और दवाओं की आवाजाही से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर सकते हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि बीकानेर में भेजे गए इंजेक्शनों का स्टॉक कितना था और उनमें से कितने मरीजों को दिए गए।
बीकानेर में इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन के स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। सरकारी सप्लाई में शामिल दवाओं की निगरानी और उनके वितरण की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल दिल्ली पुलिस की जांच जारी है। चार आरोपियों की गिरफ्तारी और 22 वायल की बरामदगी के बाद अब जांच का फोकस सरकारी अस्पतालों की सप्लाई चेन पर है। यदि जांच में किसी अस्पताल या सप्लाई व्यवस्था से जुड़े व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

