बीकानेर में शिक्षा विभाग के बीच सत्र स्थानांतरण पर अदालत की तल्ख टिप्पणी, सरकार ने जारी की नई सूची
दो दिन पहले अदालत ने शिक्षा विभाग द्वारा बीच सत्र में किए गए स्थानांतरणों पर गंभीर और तल्ख टिप्पणी की थी, लेकिन राज्य सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। गुरुवार रात को विभाग ने एक और स्थानांतरण सूची जारी कर दी, जिससे शिक्षक और अभिभावक दोनों ही असंतोष व्यक्त कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग की यह नई सूची उन शिक्षकों के स्थानांतरण से संबंधित है, जिन्हें बीच सत्र में विभिन्न स्कूलों और जिलों में भेजा गया है। अदालत ने पहले ही इस प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा था कि शिक्षकों के बीच सत्र स्थानांतरण से शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बीच सत्र स्थानांतरण से स्कूलों में पढ़ाई की स्थिरता बिगड़ती है। छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए अचानक बदलाव तनावपूर्ण होता है और पढ़ाई पर नकारात्मक असर डालता है। इसके अलावा, यह निर्णय अक्सर अधिकारियों की मनमानी और प्रशासनिक ढील का संकेत देता है।
सरकार ने हालांकि अदालत की टिप्पणी के बावजूद नई सूची जारी की। शिक्षकों का कहना है कि इस तरह की जल्दीबाजी और बिना योजना के किए गए स्थानांतरण से उनके व्यक्तिगत जीवन और परिवार पर भी असर पड़ता है। कई शिक्षक ऐसे स्थानांतरणों के कारण अपने बच्चों की पढ़ाई और घर की व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायत कर चुके हैं।
बीकानेर के शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थानांतरण जरूरी भी है, तो उसे छात्रों की पढ़ाई की समाप्ति के बाद या सत्र के अंतराल में ही किया जाना चाहिए। बीच सत्र में किए गए स्थानांतरण न केवल शिक्षक और छात्रों के लिए कठिनाई पैदा करते हैं, बल्कि शिक्षा प्रणाली में अस्थिरता भी बढ़ाते हैं।
स्थानीय शिक्षक संघ ने भी इस कदम की निंदा की है और कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग को अदालत की टिप्पणी को गंभीरता से लेना चाहिए था। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह की जल्दबाजी जारी रही, तो शिक्षक अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानूनी विकल्प अपनाने पर मजबूर होंगे।
वहीं, अभिभावकों में भी असंतोष है। उनका कहना है कि बीच सत्र स्थानांतरण से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और स्कूल में स्थिरता नहीं रहती। कई अभिभावक ऐसे मामलों में शिक्षा विभाग से संतुलित और न्यायसंगत निर्णय की मांग कर रहे हैं।
इस मामले ने राज्य में शिक्षा प्रशासन और सरकारी नीतियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत की स्पष्ट टिप्पणी के बावजूद विभाग की यह चाल शिक्षक और जनता दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
इस प्रकार, बीकानेर में शिक्षा विभाग द्वारा गुरुवार रात को जारी नई स्थानांतरण सूची और अदालत की पिछली तल्ख टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार और विभाग को सत्र के बीच किए जाने वाले स्थानांतरणों के प्रभाव और गंभीरता को गंभीरता से लेना चाहिए।

