बीकानेर में खेजड़ी संरक्षण को लेकर आंदोलन तेज, वीडियो में देखें 363 संतों सहित लोगों का अनशन जारी, वसुंधरा राजे ने दिया समर्थन
राजस्थान के बीकानेर जिले में खेजड़ी वृक्षों के संरक्षण को लेकर चल रहा आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। पर्यावरण और परंपरा से जुड़े इस मुद्दे पर बड़ी संख्या में संत, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग एकजुट होकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के तहत 363 संतों सहित सैकड़ों लोगों ने अनशन शुरू किया और सरकार से खेजड़ी व ओरण भूमि की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
धरना स्थल पर संतों और श्रद्धालुओं ने आंखों पर पट्टी बांधकर मौन अनशन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार और प्रशासन उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रहे हैं, इसलिए यह प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया गया है। कई भक्तों और स्थानीय लोगों ने भी संतों के समर्थन में भोजन त्यागने का निर्णय लिया।
आंदोलनकारियों का कहना है कि खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत का प्रतीक है। मरुस्थलीय क्षेत्रों में यह पेड़ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ पशुओं के चारे और ग्रामीणों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में इसकी कटाई या उपेक्षा को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश है।
इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी खेजड़ी संरक्षण की मुहिम का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर खेजड़ी की पूजा करते हुए अपनी तस्वीर साझा की और लिखा, “मैं भी खेजड़ी की पूजा करती हूं। राजनीति से ऊपर उठकर हमें इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। इसे बचाना चाहिए। मैं खेजड़ी और ओरण (गोचर भूमि) को बचाने की मुहिम में सबके साथ हूं।” उनके इस बयान के बाद आंदोलन को और मजबूती मिली है।
वहीं, पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा चाहें तो आज ही विधानसभा में इस संबंध में कानून बनाने की घोषणा कर सकते हैं। उन्होंने मांग की कि खेजड़ी और ओरण भूमि की सुरक्षा के लिए विशेष कानून दो दिन के भीतर बनाया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इनकी कटाई या अतिक्रमण रोका जा सके।
धरना दे रहे संतों और संगठनों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह सिर्फ पर्यावरण का नहीं, बल्कि आस्था और अस्तित्व का सवाल है।
बीकानेर में जारी इस आंदोलन ने अब राज्यभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।

