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Bhopal गैस पीड़ित पांच लाख लोगों की उम्मीदें कोर्ट से अगली तारीख मिलते ही मायूसी में बदलीं11 साल बाद गैस पीड़ितों की सुनवाई, लेकिन, सरकार बोली-अभी तैयार नहीं
 

Bhopal गैस पीड़ित पांच लाख लोगों की उम्मीदें कोर्ट से अगली तारीख मिलते ही मायूसी में बदलीं11 साल बाद गैस पीड़ितों की सुनवाई, लेकिन, सरकार बोली-अभी तैयार नहीं

मध्यप्रदेश न्यूज़ डेस्क, यूनियन कार्बाइड गैस हादसे के पीड़ितों को लेकर काम कर रहे गैस पीड़ित संगठनों ने  सर्वोच्च न्यायालय में सुधार याचिका की सुनवाई की तैयारी में बरती गई लापरवाही पर भारत सरकार की भर्त्सना की.
उन्होंने कहा कि याचिका दायर होने के 11 साल बाद अभी तक भारत सरकार ने भोपाल के 5 लाख गैस पीड़ितों के कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए कोई मजबूत दलील पेश नहीं की. उल्टा अगली तारीख और ले ली. अगले तीन हफ्ते में सरकार की कार्यवाही से यह ज़ाहिर होगा की सरकार वास्तव में गैस पीड़ित संगठनों की कितनी परवाह करती है. रशीदा बी ने कहा कि अगली सुनवाई तक भारत सरकार यह सुनिश्चित करे कि गैस हादसे की वजह से हुए वास्तविक नुकसान की तथ्यात्मक जानकारी पांच न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष प्रस्तुत की जाए.
 हुई सुनवाई में भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों को बताया कि वह सुनवाई के लिए अभी तैयार नहीं है और सरकार के जारी होने वाले निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं . इस मामले की अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को होगी. भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढ़ींगरा ने कहा कि सरकार इस समय का उपयोग करेगी और गैस काण्ड की वजह से हुई मौतों और इंसानी सेहत को पहुंचे नुकसान के आंकड़े को सही करेगी.

38 साल से इंसाफ की लड़ाई
नौशीन खान ने बताया कि सुनवाई के दौरान उन वैज्ञानिक अध्ययनों पर ध्यान दिया जाए जिसमें गैस पीड़ित माता-पिता की संतानों के स्वास्थ्य को क्षति पहुंचने के सबूत हैं. सरकार की सुधार याचिका में हादसे के बाद पैदा हुई पीढ़ी के स्वास्थ्य को पहुंची क्षति का जिक्र भी नहीं है. 38 सालों में भोपाल गैस पीड़ित इंसाफ की लड़ाई लड़ हैं.

भोपाल न्यूज़ डेस्क !!!
 

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