Samachar Nama
×

Bhopal अतिक्रमण, सीवेज और मानवीय गतिविधियां बढ़ने का दुष्प्रभाव, तालाब को हो सकता है गंभीर नुकसान,बड़ा तालाब में तेजी से घट रही जैव विविधता, 800 से घटकर 156 ही बची जीवों की प्रजातियां
 

Bhopal अतिक्रमण, सीवेज और मानवीय गतिविधियां बढ़ने का दुष्प्रभाव, तालाब को हो सकता है गंभीर नुकसान,बड़ा तालाब में तेजी से घट रही जैव विविधता, 800 से घटकर 156 ही बची जीवों की प्रजातियां

मध्यप्रदेश न्यूज़ डेस्क,  राजधानी की रामसर साइट बड़ा तालाब में जैव विविधता तेजी से कम होती जा रही है. 20 साल में यह क्षरण बहुत तेजी से हुआ है. वर्ष 2000 में जहां यहां 800 से अधिक जीव-जंतुओं की प्रजातियां पाई जाती थी वहीं अब केवल यहां 156 प्रजातियां ही बची हैं. इससे साफ जाहिर है कि तालाब में गंदगी मिलना भी कम नहीं हुई है. यही जीव-जंतु तालाब के पानी के साथ एक ईकोसिस्टम तैयार करते हैं जिसमें सभी जीव जीवित रह पाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार जैव विविधता इसी तरह खत्म होती रही तो आगामी 50 साल में तालाब भी सिकुड़कर खत्म हो सकता है. एनजीटी के समक्ष नगर निगम भले ही दावा करे कि बड़ा तालाब में मिलने वाले सभी नाले रोक दिए गए हैं या डायवर्ट कर दिए गए हैं लेकिन घटती जैवविविधता इसे गलत बता रही है. सूचना के अधिकार के तहत पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन -एप्को से प्राप्त एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. यह हालत तब है जबकि बड़ा तालाब से संबंधित 11 प्रकरण हाईकोर्ट में चल रहे हैँ और तीन प्रकरण एनजीटी में विचाराधीन हैं. एनजीटी और कोर्ट द्वारा कई बार निर्देश भी जारी किए गए लेकिन उन पर अभी तक अमल नहीं हो पाया. एनजीटी ने हाल ही में भदभदा की ओर से अतिक्रमण हटाने के फिर से निर्देश दिए हैं लेकिन नगर निगम और जिला प्रशासन यह कब्जे नहीं हटा रहा है.

यह हैं कारण
● तालाब के पानी में सीवेज का मिलना
● जो एसटीपी बने हैं वह भी बंद पड़े हैं या मानकों के अनुसार ट्रीटमेंट नहीं होना
● तालाब के कैचमेंट और वेटलैंड में अवैध अतिक्रमण
● विभिन्न धार्मिक क्रियाकलापों का विसर्जन
● आसपास सॉलिड वेस्ट की डंपिंग
● मानवजन्य गतिविधियां
● आसपास से हजारों पेड़ों की कटाई
● व्यावसायिक गतिविधियां और डीजल से संचालित क्रूज और बोट्स का संचालन

भोपाल न्यूज़ डेस्क !!!
 

Share this story