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भीलवाड़ा में लेक्चरर ट्रांसफर के विरोध में धरना, वीडियो में देखें 7 छात्राओं की बिगड़ी तबीयत, SDM से छात्रों की तीखी बहस

भीलवाड़ा में लेक्चरर ट्रांसफर के विरोध में धरना, वीडियो में देखें 7 छात्राओं की बिगड़ी तबीयत, SDM से छात्रों की तीखी बहस

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक स्कूल लेक्चरर के ट्रांसफर के विरोध में चल रहे धरने के दौरान गुरुवार को हालात उस समय बिगड़ गए, जब धरने पर बैठी 7 छात्राओं की तबीयत अचानक खराब हो गई। सुबह से भूखी बैठी छात्राओं में से 2 बेहोश हो गईं, जबकि 5 अन्य की हालत बिगड़ गई और वे बदहवास होकर रोने लगीं। घटना के बाद धरना स्थल पर अफरा-तफरी मच गई।

जानकारी के अनुसार, छात्र-छात्राएं अपने प्रिय स्कूल लेक्चरर के स्थानांतरण के विरोध में धरने पर बैठे थे। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल थे, जिनमें कई छात्राएं भी थीं। बताया जा रहा है कि छात्राएं सुबह से कुछ खाए-पिए बिना धरने पर बैठी थीं। लंबे समय तक भूखे रहने और मानसिक तनाव के कारण अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।

जब दो छात्राएं बेहोश होकर गिर पड़ीं तो मौके पर मौजूद शिक्षकों और अन्य विद्यार्थियों ने तुरंत उन्हें संभाला। छात्राओं को पानी पिलाया गया और प्राथमिक उपचार दिया गया। बेहोश हुई छात्राओं को स्टाफ रूम में ले जाया गया, जहां डॉक्टर को बुलाकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद छात्राओं को घर भेज दिया। अन्य बदहवास छात्राओं को भी कुछ देर आराम देकर सामान्य किया गया।

इससे पहले धरने पर बैठे छात्रों से बातचीत करने के लिए उपखंड अधिकारी (SDM) तान्या रिणवा मौके पर पहुंचीं। SDM ने छात्रों से धरना समाप्त करने और अपनी बात शांतिपूर्वक रखने की अपील की। बातचीत के दौरान माहौल उस समय गर्मा गया, जब एक छात्र अचानक खड़ा होकर नारे लगाने लगा। इसे लेकर SDM और छात्र के बीच तीखी बहस हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, SDM तान्या रिणवा छात्र के व्यवहार से नाराज हो गईं और उसे समझाने की कोशिश की। इसी दौरान SDM ने छात्र से सवाल करते हुए कहा कि अगर शिक्षक ने आपको पढ़ाया है तो अमेरिका की पांच नदियों के नाम बताओ। इस पर छात्र ने जवाब देने से मना कर दिया। छात्र के इनकार पर SDM ने सख्त लहजे में कहा, “आप नेता मत बनो।” यह संवाद वहां मौजूद छात्रों और शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

घटना के बाद धरना स्थल पर तनाव का माहौल बन गया। हालांकि, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभालते हुए छात्रों को शांत किया। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि छात्रों की मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

छात्रों का कहना है कि संबंधित लेक्चरर लंबे समय से स्कूल में पढ़ा रहे हैं और उनकी पढ़ाई से छात्रों को काफी लाभ मिला है। ऐसे में उनका ट्रांसफर छात्रों के भविष्य पर असर डाल सकता है। इसी कारण वे ट्रांसफर रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

वहीं, प्रशासन का कहना है कि ट्रांसफर एक नियमित प्रक्रिया है और इसे नियमों के तहत ही किया जाता है। छात्रों से अपील की गई है कि वे अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखें और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें।

इस घटना ने एक बार फिर छात्रों के आंदोलनों में स्वास्थ्य और संवाद की जरूरत को उजागर किया है। भूख और तनाव के बीच किया गया विरोध प्रदर्शन किस तरह गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है, यह भीलवाड़ा की इस घटना से साफ दिखाई दिया।

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