भीलवाड़ा में मां ने टेंट गाड़ने वाली कील से घोंप घोंपकर दो बच्चों को उतारा मौत के घाट, वजह बताई तो हिल गई पुलिस
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। यहां एक मां, जो कल तक अपने बच्चों के साथ इंस्टाग्राम पर रील्स बनाती थी और सोशल मीडिया पर अपनी खुशहाल जिंदगी की झलक दिखाती थी, अचानक ही अपने ही बच्चों के लिए जानलेवा बन गई। इस मामले ने न सिर्फ पुलिस बल्कि आम जनता को भी चौंका दिया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी मां संजू देवी को गिरफ्तार कर लिया गया है। शुरुआती पूछताछ में उसके खिलाफ कई ऐसे खुलासे हुए हैं, जिनसे सामने आया कि मासूम बच्चों के प्रति उसकी हरकतें बिल्कुल भी सामान्य नहीं थीं। संजू देवी पर आरोप है कि उसने अपने बच्चों के साथ लगातार हिंसक व्यवहार किया और उनके जीवन को खतरे में डालने वाली हरकतें की।
स्थानीय लोग बताते हैं कि संजू देवी और उसके बच्चे सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते थे। वह अक्सर अपने बच्चों के साथ इंस्टाग्राम रील्स बनाती थी, जो देखने में मासूम और खुशहाल लगती थीं। लेकिन अब सामने आया है कि यह सब केवल एक आड़ था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर दिखाए गए हंसते-खेलते चेहरे के पीछे दर्दनाक हकीकत छिपी हुई थी।
मांडलगढ़ थाना प्रभारी ने बताया, "संजू देवी की गिरफ्तारी के बाद हमने उसके घर का सर्च ऑपरेशन किया। इस दौरान हमें कई ऐसे सबूत मिले, जो बच्चों के प्रति उसके हिंसक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाले व्यवहार को उजागर करते हैं। प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि बच्चे लंबे समय से उसके उत्पीड़न का शिकार थे।"
इस सनसनीखेज घटना के बाद पूरे जिले में लोगों में गहरी चिंता और डर का माहौल है। पड़ोसी और रिश्तेदार इस बात से हैरान हैं कि कोई मां, जो अपनी खुशहाल जिंदगी को सोशल मीडिया पर दिखाती थी, वास्तव में अपने बच्चों के लिए खतरा बन सकती है।
ऐसे मामले समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। मानसिक स्वास्थ्य और घरेलू हिंसा पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस घटना की निंदा की है और बच्चों के संरक्षण के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है।
पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। संजू देवी के खिलाफ बच्चों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया गया है और मामले की आगे की जांच जारी है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर चीज़ को वास्तविक न समझें और बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रहें।

