856 स्कूलों की मरम्मत पर 17.12 करोड़ की स्वीकृति के बावजूद अटकी प्रक्रिया, शर्तों ने बढ़ाई मुश्किलें
जिले में भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हुए 856 सरकारी स्कूलों की मरम्मत के लिए स्वीकृत 17.12 करोड़ रुपये का बजट अब प्रशासनिक अड़चनों में फंस गया है। वित्तीय वर्ष समाप्ति के करीब होने के बावजूद न तो कई जगहों पर काम पूरे हो पाए हैं और न ही भुगतान प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सकी है।
जानकारी के अनुसार, मरम्मत कार्यों की धीमी गति और कड़ी शर्तों के चलते विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला प्रशासन द्वारा भुगतान और कार्य पूर्णता को लेकर लगाई गई अतिरिक्त शर्तों ने प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है।
स्थिति यह है कि जहां कुछ स्कूलों में मरम्मत कार्य शुरू भी हुए हैं, वहां भी भुगतान अटकने के कारण काम की गति प्रभावित हो रही है। ठेकेदारों का कहना है कि सख्त शर्तों के कारण समय पर काम पूरा करना और भुगतान प्राप्त करना दोनों चुनौती बन गए हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ये शर्तें आवश्यक हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनके कारण कार्यों में देरी हो रही है।
स्थानीय स्तर पर अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी चिंता जताई है कि बारिश से क्षतिग्रस्त स्कूलों की मरम्मत में देरी होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
प्रशासन का कहना है कि सभी कार्यों की मॉनिटरिंग की जा रही है और जल्द ही प्रक्रियाओं को तेज कर मरम्मत कार्यों को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, मौजूदा स्थिति में लालफीताशाही और शर्तों के चलते प्रोजेक्ट की रफ्तार पर स्पष्ट असर दिखाई दे रहा है।

