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गरीबी और कर्ज के बीच बच्चियों का सौदा, ‘गोदनामे’ की आड़ में मानव तस्करी का जाल; मुंबई-पुणे तक पहुंचाई जा रहीं मासूम

गरीबी और कर्ज के बीच बच्चियों का सौदा, ‘गोदनामे’ की आड़ में मानव तस्करी का जाल; मुंबई-पुणे तक पहुंचाई जा रहीं मासूम

तीन-चार साल की मासूम बच्ची, परिवार की आर्थिक तंगी और सिर पर कर्ज का बोझ। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर बच्चियों को कथित तौर पर दूसरे परिवारों के हवाले किया जा रहा है। कागजों पर इस सौदे को ‘गोदनामा’ या गोद लेने की प्रक्रिया का नाम दिया जाता है, लेकिन इसके पीछे मानव तस्करी का गंभीर संदेह सामने आया है। एक पड़ताल के मुताबिक, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों से बच्चियों को मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों तक पहुंचाने का नेटवर्क सक्रिय होने का दावा किया गया है।

स्टांप पेपर पर गोदनामा, पहचान तक बदलने का आरोप

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ परिवार आर्थिक मजबूरियों के बीच अपनी बच्चियों को दूसरे लोगों के हवाले कर देते हैं। इस प्रक्रिया को वैध दिखाने के लिए स्टांप पेपर पर गोदनामा तैयार किए जाने का दावा है। इसके बाद बच्चियों को अलग-अलग शहरों में ले जाया जाता है। आरोप है कि वहां उनकी उम्र, नाम और पहचान से संबंधित विवरण तक बदल दिए जाते हैं, ताकि उनके वास्तविक परिवार और पृष्ठभूमि का पता लगाना मुश्किल हो जाए।

पड़ताल में दावा किया गया है कि कुछ बच्चियों को आगे चलकर डांस बार या देह व्यापार जैसे शोषणकारी माहौल में धकेलने की आशंका रहती है। हालांकि, प्रत्येक मामले में बच्चियों के साथ क्या हुआ, इसकी पुष्टि अलग-अलग जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।

लाखों रुपये में सौदे का दावा

रिपोर्ट में राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में बच्चियों को कथित तौर पर तीन से पांच लाख रुपये में दिए जाने और आगे चलकर बड़े शहरों में उनकी कीमत कई गुना बढ़ने का दावा किया गया है। मुंबई में एक कथित बिचौलिए द्वारा बच्चियों की खरीद-फरोख्त और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने की बात भी सामने रखी गई है। ये दावे जांच के योग्य हैं और इन्हें सभी परिवारों या मामलों पर लागू नहीं माना जा सकता।

कानूनी प्रक्रिया के बिना गोद लेना अपराध का कारण बन सकता है

भारत में बच्चे को गोद लेने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। केवल स्टांप पेपर या नोटरी पर समझौता कर लेने से गोद लेना कानूनी नहीं हो जाता। यदि किसी बच्चे को पैसे के बदले खरीदा या बेचा जाता है, तो मामला बाल तस्करी और किशोर न्याय कानून के तहत गंभीर अपराध बन सकता है।

पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें बच्चियों को गोद लेने के नाम पर दूसरे लोगों को सौंपा गया। सितंबर 2023 में पुणे में एक बच्ची को कथित तौर पर पैसे के बदले देने और उससे भीख मंगवाने के मामले में पुलिस ने बच्ची के माता-पिता, उसे अपने पास रखने वाले दंपती और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी।

बच्चों की सुरक्षा के लिए सतर्कता जरूरी

ऐसे मामलों में गरीबी और कर्ज से जूझ रहे परिवारों की मजबूरी का फायदा उठाए जाने की आशंका को गंभीरता से लेने की जरूरत है। किसी बच्चे को गोद देने के नाम पर पैसे का लेन-देन, बिचौलियों की भूमिका या बच्चे की पहचान बदलने जैसी गतिविधियां दिखाई दें, तो संबंधित बाल संरक्षण इकाई या पुलिस को सूचना दी जा सकती है।

इस कथित नेटवर्क के संबंध में कितने परिवार शामिल हैं, कितनी बच्चियों की पहचान हुई है और कितने मामलों में पुलिस कार्रवाई हुई है, इसकी विस्तृत स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इसलिए पूरे नेटवर्क की वास्तविक सीमा और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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