अंतिम संस्कार से पहले अर्थी से उठकर भागा मुर्दा, वीडियो में देखें निकली जिंदा व्यक्ति की अंतिम यात्रा
शीतला सप्तमी के मौके पर शुक्रवार को एक अद्भुत और अनोखी परंपरा का पालन करते हुए भीलवाड़ा में करीब 425 साल पुरानी परंपरा के तहत मुर्दे की सवारी निकाली गई। यह परंपरा स्थानीय लोग हर साल शीतला सप्तमी के दिन बड़ी श्रद्धा और जोश के साथ निभाते हैं, जो हर साल को आकर्षण का केंद्र बनती है।
इस परंपरा के तहत, एक अर्थी पर एक जिंदा व्यक्ति को लेटाया गया और उसकी अंतिम यात्रा ढोल-नगाड़े बजाते हुए बाजार से निकाली गई। सड़क पर लोग उत्साहित थे और इस अनोखी सवारी को देखने के लिए इकट्ठे हो गए। जैसे ही अर्थी को बाहर निकाला गया, लोग नृत्य और ध्वनियों में झूमते हुए उसका अनुसरण करने लगे।
अर्थी पर लेटे व्यक्ति की स्थिति देख कर यह प्रतीत हो रहा था कि उसका अंतिम संस्कार किया जा रहा है, लेकिन जैसे ही अर्थी का सफर खत्म हुआ, वह व्यक्ति अचानक उठकर भाग खड़ा हुआ। यह घटना लोगों के लिए काफी चौंकाने वाली थी, क्योंकि परंपरा के अनुसार, अर्थी पर लेटे व्यक्ति का जीवित होना इस पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण था।
इसके बाद, लोगों ने यह सुनिश्चित किया कि परंपरा पूरी तरह से निभाई जाए, और अर्थी पर लेटे व्यक्ति के उठने के बाद एक पुतले को अंतिम संस्कार के लिए रखा गया। पुतले को न केवल अंतिम संस्कार किया गया, बल्कि उसे जूते-चप्पल भी मारे गए, जो इस परंपरा का एक हिस्सा है। यह कार्य इस संकेत के तौर पर किया जाता है कि पुतला किसी के बुरे कर्मों का प्रतीक है और उसे समाज से बाहर किया जा रहा है।
यह परंपरा स्थानीय लोगों के लिए बहुत मायने रखती है और हर साल शीतला सप्तमी के अवसर पर यह कार्यक्रम बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस आयोजन के माध्यम से लोग अपनी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को जीवित रखते हैं, जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं।
भीलवाड़ा की यह परंपरा एक अद्भुत मिश्रण है समाज, संस्कृति और श्रद्धा का, जो हर साल देखने के लिए लाखों लोगों को आकर्षित करती है।

