CBI जज पुलिस अफसर बनकर ठगे 32 लाख, फुटेज में देखें हिस्ट्रीशीटर गिरफ्तार, रिटायर्ड अकाउंटेंट ने पत्नी की एफडी भी तुड़वा ली
राजस्थान के भीलवाड़ा में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर एक रिटायर्ड अकाउंटेंट से 32 लाख 75 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। मामले में कार्रवाई करते हुए भीलवाड़ा साइबर थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी को हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी एक हिस्ट्रीशीटर है, जिसने बेहद शातिर तरीके से बुजुर्ग को अपने जाल में फंसाया। आरोपी ने खुद को कभी सीबीआई का जज तो कभी पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया-धमकाया। उसने बुजुर्ग को यह विश्वास दिलाया कि वह किसी गंभीर कानूनी मामले में फंस चुके हैं और गिरफ्तारी से बचने के लिए तत्काल रकम ट्रांसफर करनी होगी।
डर और मानसिक दबाव में आकर रिटायर्ड अकाउंटेंट ने आरोपी द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में कुल 32 लाख 75 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उन्हें ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने साइबर थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और बैंक खातों, मोबाइल लोकेशन तथा डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए आरोपी तक पहुंच बनाई। जांच के दौरान पुलिस ने गुरुग्राम में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
भीलवाड़ा साइबर थाना पुलिस ने बताया कि कार्रवाई के दौरान आरोपी के विभिन्न बैंक खातों में जमा 16 लाख 36 हजार 153 रुपये होल्ड करवा दिए गए हैं, ताकि रकम को आगे ट्रांसफर न किया जा सके। इसके अलावा पुलिस ने कोर्ट से आदेश जारी करवाकर 13 लाख 46 हजार 153 रुपये पीड़ित को वापस दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उन्हें वीडियो कॉल या फोन पर मानसिक दबाव में लेते हैं।
पुलिस ने आम लोगों, खासकर वरिष्ठ नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या सरकारी एजेंसी के नाम पर आने वाली धमकियों से सतर्क रहें। किसी भी स्थिति में बिना पुष्टि किए बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर न करें।
फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। संभावना जताई जा रही है कि आरोपी का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है।

