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NEET री-एग्जाम से पहले बड़ा खुलासा: भीलवाड़ा में फर्जी पेपर बेचने वाला छात्र गिरफ्तार, वीडियो में देंखे ‘पेपर माफिया’ नाम से चला रहा था टेलीग्राम चैनल

NEET री-एग्जाम से पहले बड़ा खुलासा: भीलवाड़ा में फर्जी पेपर बेचने वाला छात्र गिरफ्तार, वीडियो में देंखे ‘पेपर माफिया’ नाम से चला रहा था टेलीग्राम चैनल

री-नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) री-एग्जाम से ठीक तीन दिन पहले राजस्थान के भीलवाड़ा से फर्जी पेपर बेचने के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 19 वर्षीय एक छात्र को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर टेलीग्राम के जरिए परीक्षा से जुड़े फर्जी पेपर और डाटा बेचने का काम कर रहा था।

‘पेपर माफिया’ नाम से चल रहा था टेलीग्राम चैनल

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी छात्र टेलीग्राम पर “पेपर माफिया” नाम से एक चैनल संचालित कर रहा था। इसी चैनल के जरिए वह NEET परीक्षा से जुड़े फर्जी प्रश्नपत्र और अन्य सामग्री उपलब्ध कराने की डील करता था। बताया जा रहा है कि आरोपी बैन किए गए टेलीग्राम एप का इस्तेमाल वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) के जरिए कर रहा था, जिससे उसकी लोकेशन और पहचान छिपाई जा सके।

दिल्ली से मिले इनपुट पर हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई दिल्ली से मिले इनपुट के आधार पर की गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी। इसके बाद गुरुवार देर रात करीब 1 बजे भीलवाड़ा शहर के पटेल नगर स्थित उसके घर पर छापा मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान 19 वर्षीय आकाश चौधरी के रूप में हुई है, जो खुद एक छात्र बताया जा रहा है।

तकनीकी तरीके से छिपा रहा था पहचान

पुलिस के अनुसार, आरोपी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा था। वह VPN के जरिए टेलीग्राम का उपयोग कर रहा था, ताकि उसकी ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रेस करना मुश्किल हो सके। जांच में यह भी सामने आया है कि वह अलग-अलग डिजिटल तरीकों से संभावित उम्मीदवारों से संपर्क करने की कोशिश करता था।

परीक्षा सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा से पहले इस तरह के मामले सामने आने से परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और फर्जी डाटा बेचने के मामलों ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है।

पुलिस कर रही है गहन पूछताछ

फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। यह भी जांच का विषय है कि क्या यह केवल एक व्यक्ति की गतिविधि थी या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा था।अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चल रहे ऐसे अवैध नेटवर्क को खत्म करने के लिए लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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