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भीलवाड़ा: जर्जर स्कूल भवनों पर उठे सवाल, शिक्षा विभाग पर कागजी कार्रवाई का आरोप

भीलवाड़ा: जर्जर स्कूल भवनों पर उठे सवाल, शिक्षा विभाग पर कागजी कार्रवाई का आरोप

भीलवाड़ा जिले में सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों को लेकर एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि शिक्षा विभाग केवल औपचारिकता निभाने तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर सुधार कार्य नहीं हो रहे हैं। हर वर्ष जर्जर स्कूल भवनों का सर्वे तो कराया जाता है, लेकिन मरम्मत और पुनर्निर्माण के कार्यों में अपेक्षित गति नहीं दिख रही है।

जानकारी के अनुसार, जिले के कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थित सरकारी स्कूल भवन लंबे समय से जर्जर हालत में हैं। कुछ भवनों की दीवारों में दरारें हैं, तो कई जगह छतों से प्लास्टर गिरने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद समय पर मरम्मत न होने से विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ती जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल भवनों का निरीक्षण किया जाता है और रिपोर्ट तैयार की जाती है, लेकिन उसके बाद ठोस कार्रवाई नहीं होती। कई मामलों में मरम्मत के प्रस्ताव भी बनते हैं, लेकिन बजट या प्रशासनिक मंजूरी की देरी के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाता।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है, जहां कई स्कूलों में बच्चे खतरे के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कुछ स्कूलों में तो कक्षाएं खुले आसमान या अस्थायी कमरों में चल रही हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे पढ़ाई बाधित होने की संभावना बनी रहती है।

शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, जर्जर भवनों की सूची तैयार कर उच्च स्तर पर भेजी जाती है और प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य की योजना बनाई जाती है। हालांकि, संसाधनों की कमी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण कई बार कार्य समय पर शुरू नहीं हो पाते।

इस मुद्दे पर सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मांग की है कि जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत को तत्काल प्राथमिकता दी जाए और किसी भी दुर्घटना से पहले ठोस कदम उठाए जाएं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल भवनों की खराब स्थिति न केवल बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह शिक्षा की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। एक सुरक्षित और बेहतर माहौल ही बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को मजबूत बना सकता है।

फिलहाल, भीलवाड़ा जिले में जर्जर स्कूल भवनों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है और लोग प्रशासन से शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शिक्षा वातावरण मिल सके।

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