वीडियो में देखें भरतपुर में राजीविका कर्मचारियों ने सरपंचों के खिलाफ प्रदर्शन किया, पेमेंट में रिश्वत की शिकायत
जिले के हलैना क्षेत्र में सोमवार को राजीविका (महिला स्वयं सहायता समूह) की कर्मचारी महिलाओं ने सरपंचों के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का मुख्य कारण महिलाओं को पिछले सात महीनों से वेतन न मिलने और पेमेंट में कथित रिश्वत की मांग बताया जा रहा है।
महिलाओं का आरोप है कि सरपंच अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए पेमेंट के 50 प्रतिशत की रिश्वत मांग रहे हैं। जब महिलाएं अपने कार्य के अनुसार पेमेंट की मांग करती हैं, तो सरपंच उन्हें एमओयू (एमोमेंट ऑफ अंडरस्टैंडिंग) कैंसिल करने की धमकी देते हैं। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय सीऐलफ तिरंगा राजीविका क्लस्टर की अध्यक्ष मनोज मीणा ने मीडिया से बातचीत की।
मनोज मीणा ने कहा कि "सोमवार को सरपंचों ने सफाई के एमओयू को कैंसिल करने के लिए साजिश रचकर महिलाओं को नोटिस जारी किए हैं। पिछले सात महीनों से महिलाओं का पेमेंट रोक दिया गया है। इसके चलते राजीविका की महिलाओं की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गई है और उन्हें गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।"
उन्होंने आगे कहा कि सरपंच सिर्फ पेमेंट के बदले रिश्वत की मांग कर रहे हैं। महिलाएं अपने काम के प्रति जिम्मेदार हैं, लेकिन प्रशासनिक और स्थानीय नेतृत्व की उपेक्षा के कारण वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। महिलाओं ने यह भी सुझाव दिया कि यदि वे काम नहीं कर रही हैं, तो सरपंच गांव-गांव जाकर काम की समीक्षा और निगरानी करें। इस तरह उनकी शिकायतें और समस्याएं स्पष्ट हो सकती हैं और किसी तरह का अवैध दबाव या रिश्वत मांगने का मामला सामने नहीं आएगा।
स्थानीय प्रशासन ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन राजीविका की महिलाओं का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों में काम करने वाली महिलाओं को सुरक्षा और समय पर पेमेंट सुनिश्चित करना आवश्यक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामले, जहां स्थानीय प्रतिनिधि कर्मचारियों के अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की सफलता पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं। समय पर पेमेंट और पारदर्शी कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने से ही ऐसे विवादों को रोका जा सकता है।
इस प्रदर्शन के बाद जिले के प्रशासन और संबंधित विभागों से अपेक्षा है कि सटीक जांच और महिलाओं के पेमेंट की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय प्रशासन और सरपंचों के प्रति उनका भरोसा भी बढ़ेगा।
राजीविका की महिला कर्मचारियों का यह प्रदर्शन स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग के रूप में देखा जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने नारों और प्लेकार्ड के माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा की और यह स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रकार के दबाव और अवैध मांगों के आगे नहीं झुकेंगी।

