वीडियो में देखें भरतपुर में अंधेरे में अंतिम संस्कार, श्मशान में लाइट नहीं, मोबाइल टॉर्च की रोशनी में हुई सभी रस्में
राजस्थान के भरतपुर जिले में नगरपालिका की लापरवाही का शर्मनाक मामला सामने आया है। शहर के काली बगीची स्थित श्मशान घाट में मंगलवार देर शाम एक 92 वर्षीय बुजुर्ग का अंतिम संस्कार पूरी तरह अंधेरे में करना पड़ा। हालात इतने खराब थे कि श्मशान के मुख्य गेट से लेकर अंदर तक किसी भी जगह एक भी लाइट नहीं लगी थी। परिवार को मोबाइल की फ्लैशलाइट और टॉर्च का सहारा लेकर अंतिम संस्कार करवाना पड़ा। श्मशान की जर्जर व्यवस्था देखकर लोगों में आक्रोश है और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
मोबाइल टॉर्च की रोशनी में जुटाया गया अंतिम संस्कार का सामान
चार बाग क्षेत्र में रहने वाले जगदीश प्रसाद सिंघल (92 वर्ष) का मंगलवार शाम लगभग 5 बजे निधन हो गया था। उनके बेटे सुनील कुमार ने बताया— “हम रात करीब 8 बजे अंतिम यात्रा श्मशान ले गए। वहां पहुंचते ही पता चला कि लाइट नहीं है। अंधेरे में किसी तरह एक-दूसरे का हाथ पकड़कर अंदर गए। कई लोग ठोकर खाकर गिरते-गिरते बचे।” अंदर जाकर भी कोई व्यवस्था नहीं मिली। परिवार को मोबाइल टॉर्च जलाकर लकड़ी और अन्य आवश्यक सामान इकट्ठा करना पड़ा। मृतक के परिवार ने बताया कि श्मशान के आसपास अक्सर सांप-बिच्छुओं का डर रहता है, ऐसे में रात के अंधेरे में अंतिम विधि करना बेहद जोखिम भरा था।
श्मशान में नहीं बिजली का कनेक्शन, न ही वैकल्पिक व्यवस्था
श्मशान की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने बताया—
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वर्षों से बिजली का कनेक्शन नहीं
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रात में अंतिम संस्कार की कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं
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रास्तों पर न लाइट, न साफ-सफाई, न संकेतक पट्टियां
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निगम प्रशासन का कोई ध्यान नहीं
लोगों ने कहा कि कई बार शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती।
भावुक परिवार बोला — अंतिम समय में भी इंसान को सम्मान नहीं
मृतक के रिश्तेदार ने रोष जताते हुए कहा“यह शहर का प्रमुख श्मशान है, जहां रोज अंतिम संस्कार होते हैं। फिर भी अंधेरे में अंतिम विधि कराना इंसानियत का अपमान है। बुजुर्ग का जीवन भर मेहनत की और अंत में यह हाल?”
परिवार ने मांग की है कि तुरंत श्मशान में—
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बिजली कनेक्शन बहाल किया जाए
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रात में प्रकाश की सुविधा हो
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रास्तों की मरम्मत हो
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सुरक्षा के लिए कर्मचारी तैनात हों
स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा “नगर निगम टैक्स तो लेता है, लेकिन अंतिम संस्कार जैसे पवित्र स्थल की सुध तक नहीं लेता।” लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए, ताकि आगे किसी और परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।

