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भीषण गर्मी में भी भरतपुर के वेटलैंड्स में डटे विदेशी पक्षी, वीडियो मे देखें 45 डिग्री टेम्प्रेचर में रहने पर बर्ड वॉचर्स हैरान

भीषण गर्मी में भी भरतपुर के वेटलैंड्स में डटे विदेशी पक्षी, वीडियो मे देखें 45 डिग्री टेम्प्रेचर में रहने पर बर्ड वॉचर्स हैरान

राजस्थान के भरतपुर और आसपास के वेटलैंड क्षेत्रों में इस बार एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है। यूरोप, अलास्का और साइबेरिया जैसे बेहद ठंडे इलाकों से आए प्रवासी पक्षी 40 से 45 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी के बावजूद यहां रुके हुए हैं। आमतौर पर इस मौसम में इन पक्षियों का अपने मूल स्थान की ओर लौटना शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार उनका व्यवहार पूरी तरह बदल गया है।

प्राकृतिक संरक्षण और पक्षी प्रेमियों के लिए यह स्थिति चौंकाने वाली है। बर्ड वॉचर्स का कहना है कि प्रवासी पक्षियों के इस असामान्य व्यवहार को इकोलॉजी में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पक्षियों की चहलकदमी और उनकी गतिविधियों ने भरतपुर के वेटलैंड्स के प्राकृतिक दृश्य को भी अलग ही रूप दे दिया है।

हर साल सामान्य रूप से ये प्रवासी पक्षी दिसंबर और जनवरी के बीच भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (केवलादेव घना) जैसे वेटलैंड क्षेत्रों में आते हैं और मार्च के बाद धीरे-धीरे अपने ठंडे मूल आवासों की ओर लौट जाते हैं। लेकिन इस बार गर्मी के चरम पर भी वे यहीं बने हुए हैं और सक्रिय रूप से झीलों और दलदली क्षेत्रों में अठखेलियां करते नजर आ रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ये पक्षी सामान्यतः माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान वाले इलाकों में पाए जाते हैं, जहां बर्फीली परिस्थितियां होती हैं। ऐसे में भारत के रेगिस्तानी और अत्यधिक गर्म मौसम में उनका लंबे समय तक टिके रहना एक असामान्य घटना मानी जा रही है।

पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव जलवायु परिवर्तन, स्थानीय मौसम पैटर्न में बदलाव, जल स्रोतों की उपलब्धता और वेटलैंड्स की स्थिति में सुधार या परिवर्तन से जुड़ा हो सकता है। कुछ विशेषज्ञ इसे वैश्विक स्तर पर बदलते माइग्रेशन पैटर्न का संकेत भी मान रहे हैं।

भरतपुर के वेटलैंड्स में इन पक्षियों की मौजूदगी ने न केवल पर्यावरणविदों को आकर्षित किया है, बल्कि पर्यटकों और बर्ड वॉचर्स के लिए भी यह एक खास अनुभव बन गया है। झीलों के किनारे पक्षियों की गतिविधियों ने पूरे इलाके के प्राकृतिक सौंदर्य को और अधिक जीवंत बना दिया है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बदलावों पर गहराई से अध्ययन की जरूरत है, ताकि यह समझा जा सके कि क्या यह अस्थायी स्थिति है या फिर आने वाले समय में प्रवासी पक्षियों के व्यवहार में स्थायी परिवर्तन देखने को मिलेगा।

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