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भरतपुर में पुलिस कॉन्स्टेबल पर कार्रवाई, वीडियो मे जानें युवती को थाने ले जाने का मामला सामने आने पर बर्खास्त

रात को थाने में युवती लाने पर दो कॉन्स्टेबल बर्खास्त, भरतपुर SP की कार्रवाई

भुसवार थाना में तैनात दो पुलिस कॉन्स्टेबलों को बर्खास्त कर दिया गया है। आरोप है कि 22 फरवरी की रात करीब 12 बजे इन दोनों कॉन्स्टेबलों ने एक युवती को थाने ले जाकर रखा। मामला वीडियो के सामने आने के बाद एसपी दिगंत आनंद ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को सेवा से हटा दिया।

बर्खास्त किए गए कॉन्स्टेबलों के नाम सोनू और परमवीर हैं। पुलिस ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच एएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

मामले का वीडियो बनाने वाले युवक ने बताया कि 22 फरवरी की रात करीब 12 बजे उनके घर के पास एक बाइक रुकी थी। बाइक पर सवार दो युवक एक युवती को अपने साथ ले जा रहे थे। युवक को शक हुआ और उसने बाइक का पीछा किया। बाइक सीधे भुसवार पुलिस थाने के अंदर पहुंच गई।

वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि युवती को पुलिस थाना ले जाया गया, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर इस घटना की निंदा और पुलिस की जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे।

एसपी दिगंत आनंद ने कहा कि यह घटना पुलिस की छवि और जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा। एसपी ने बताया कि जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भुसवार थाना के आसपास के लोगों ने बताया कि यह घटना पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई थाने में सुरक्षित नहीं है, तो जनता का विश्वास कमजोर होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस कर्मियों की जवाबदेही और प्रशिक्षण इस तरह की घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पुलिस स्टाफ के लिए नैतिक और पेशेवर प्रशिक्षण आवश्यक है, ताकि जनता के प्रति भरोसा बना रहे और ऐसे मामले दोबारा न हों।

बर्खास्त कॉन्स्टेबलों पर कार्रवाई के साथ ही यह मामला जांच के दायरे में है। जांच अधिकारी एएसपी स्तर पर पूरे मामले की तह तक जाएंगे, जिसमें यह देखा जाएगा कि युवती को थाने क्यों ले जाया गया और क्या इसके पीछे कोई अनियमितता या दुराचार था।

मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि कानून के ऊपर कोई भी नहीं है, चाहे वह पुलिस का कोई भी अधिकारी क्यों न हो। यह घटना पुलिस और प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी है कि जनता के अधिकारों और सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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