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Bhagalpur बलिया दियारे में जाने के लिए सड़क नहीं, बरसात में गंगा का पानी बढ़ने पर नाव से आवागमन की विवशता झेलने को अभिशप्त रहते हैं लोग

Kochi जलवायु परिवर्तन के कारण जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे केरल के छोटे नाव मछुआरे तटीय समुदायों के लिए खतरा हैं

बिहार न्यूज़ डेस्क आजादी के दशकों बाद आज भी जब बलिया प्रखंड के दियारा क्षेत्र में जाना हो तो अब भी रूह कांप जाती है. आज भी वहां जाने के लिए पक्की सड़कें नहीं हैं. यदि आप किसी तरह टूटी-फूटी सड़क से हिचकोले खाकर चले भी गये तो विकास की तस्वीर के रूप में वहां समस्यायें ही दिखेंगी.

शिवनगर, शाहपुर, भवानंदपुर, मसूदनपुर, गोखले नगर विष्णुपुर, ताजपुर, मीरअलीपुर, सादीपुर, अशरफा, सोनदीपी, लाल दियारा, हुसैना, हसनपुर सहित कई गावों में जाने के लिए पक्की सड़क नहीं है.

दियारा क्षेत्र के ग्रामीण बताते हैं कि बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क आदि की व्यवस्था भी भगवान भरोसे है. इस दियारा के लोग आज भी टूटी-फूटी सड़कों पर चलने का विवश हैं. इन गावों में समुचित सड़क मार्ग नहीं रहने के कारण बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा की स्थिति भी दयनीय है. इस क्षेत्र में सड़क मार्ग दुरूस्त नहीं रहने के कारण जिले से प्रशासनिक अधिकारी भी यदा-कदा ही इस क्षेत्र के निरीक्षण के लिए जाते हैं. यही कारण है कि क्षेत्र में कार्यरत कर्मी की मनमानी चलती है.

बताते चलें कि प्रखंड मुख्यालय से दियारा के विभिन्न गांवों तक जाने के लिए मुख्य रूप से तीन रास्ते हैं. इसमें से एक रास्ता लखमिनिया से चेचियाही ढाब होते हुए मीरअलीपुर, मसूदनपुर, शाहपुर, भवानंदपुर, शिवनगर तथा दूसरा रास्ता मनसेरपुर शिव मंदिर के समीप से सादीपुर करारी होते हुए सादीपुर दियारा, नौरंगा, गोखले नगर विष्णुपुर, ताजपुर की ओर एवं तीसरा रास्ता मनसेरपुर- तुलसीटोल होते हुए पहाड़पुर, मिर्जापुर, सोनदीपी, हसनपुर, हुसैना, लाल दियारा सहित अन्य गांवों की ओर जाने वाली सड़क शामिल है. वर्तमान में जगह-जगह बाढ़ का पानी रहने के कारण नाव ही आवागमन का एकमात्र साधन है.

 

भागलपुर न्यूज़ डेस्क

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