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बाड़मेर में मानसून की विदाई के साथ बढ़ी किसानों की चिंता, बारिश नहीं हुई तो अकाल का संकट गहराएगा

बाड़मेर में मानसून की विदाई के साथ बढ़ी किसानों की चिंता, बारिश नहीं हुई तो अकाल का संकट गहराएगा

बाड़मेर इस बार भीषण सूखे और अकाल जैसे हालात की चिंता से जूझ रहा है। जिले में चार दिनों तक सक्रिय रहा मानसून अब कमजोर पड़ने के बाद विदा हो गया है। ऐसे में किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मौसम विभाग के मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार सितंबर के बाकी दिनों में अच्छी बारिश की संभावना कम है। बारिश नहीं होने की स्थिति में खरीफ फसलों पर संकट और गहरा सकता है।

दो दिन पहले जिले के कुछ गांवों में हल्की बारिश हुई थी। किसानों को उम्मीद थी कि इसके बाद मानसून फिर सक्रिय होगा और खेतों को पर्याप्त पानी मिल सकेगा, लेकिन बारिश का दौर आगे नहीं बढ़ पाया। इसके बाद मानसून कमजोर हुआ और जिले में मौसम एक बार फिर शुष्क हो गया।

बाड़मेर में इस समय खरीफ की फसलें बारिश पर काफी हद तक निर्भर हैं। पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है। जिन इलाकों में पहले ही बारिश कम हुई है, वहां किसानों की चिंता ज्यादा है। किसान लगातार आसमान की ओर देख रहे हैं और उन्हें अब भी उम्मीद है कि मौसम में बदलाव के साथ कहीं बारिश हो जाए।

इस बार मानसून के दौरान जिले के कई हिस्सों में बारिश का वितरण समान नहीं रहा। कुछ क्षेत्रों में बारिश हुई, जबकि कई गांवों में पर्याप्त पानी नहीं गिरा। ऐसे में किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती बनी हुई है। बारिश के अभाव में फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और उत्पादन में भी कमी आने की आशंका है।

मानसून की विदाई के साथ ही अब किसानों की नजर सितंबर के अंतिम दिनों के मौसम पर टिकी है। यदि इस दौरान बारिश नहीं होती है तो खेतों में नमी की कमी और बढ़ सकती है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ेगा। पशुपालकों के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि बारिश कम होने से चारे और पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है।

किसानों का कहना है कि बारिश का दौर कमजोर पड़ने से उनकी उम्मीदों को झटका लगा है। पहले चार दिनों तक मानसून सक्रिय रहने से उन्हें राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन बाद में बारिश थमने से चिंता फिर बढ़ गई। अब किसान सरकार और प्रशासन से भी फसल की स्थिति का आकलन कराने तथा जरूरत पड़ने पर राहत की मांग कर सकते हैं।

बाड़मेर जैसे पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती जिले में खेती और पशुपालन काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर हैं। ऐसे में मानसून की कमजोर विदाई ने ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में बारिश होती है या नहीं, इसी पर किसानों की फसल और आगामी कृषि स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी।

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