'रैलियों में यही मजदूर पसीना बहाते हैं, फिर उनकी बात क्यों नहीं सुनी जाती?' वीडियो में जाने मजदूरों के समर्थन में बोले विधायक रविंद्र सिंह भाटी
बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा सीट से विधायक Ravindra Singh Bhati ने मजदूरों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा है कि उनकी बातें पूरी तरह वाजिब हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन मजदूरों ने अपनी जमीन दी है, वे उसी जमीन पर काम करने और मजदूरी मांग रहे हैं। ऐसे में उनकी मांग को गलत नहीं ठहराया जा सकता।
रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि यदि मजदूरों को उनकी ही दी हुई जमीन पर काम करने का अवसर नहीं मिलेगा, तो वे आखिर रोजगार के लिए कहां जाएंगे। उनका मानना है कि संबंधित लोगों की शिकायतों और मांगों पर समय रहते ध्यान दिया जाता तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती।
'मांगों को अनसुना किया गया, इसलिए बिगड़े हालात'
विधायक ने कहा कि मजदूरों की मांगें शुरू से ही उचित थीं, लेकिन जब उनकी बातों को लगातार अनदेखा किया गया, तब हालात तनावपूर्ण हो गए। उन्होंने प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों से आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की अपील की।भाटी के अनुसार, विकास योजनाओं और परियोजनाओं में प्रभावित लोगों की चिंताओं को समझना और उनका समाधान करना जरूरी है, ताकि विवाद की स्थिति पैदा न हो।
'चुनाव में याद आते हैं मजदूर'
अपने बयान में विधायक ने राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनावी रैलियों और सभाओं में यही मजदूर बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।उन्होंने कहा, "चार-पांच घंटे तक धूप और गर्मी में रैलियों में खड़े रहते हैं, नारे लगाते हैं, पसीना बहाते हैं और मतदान भी करते हैं। लेकिन जब उनके अधिकारों और समस्याओं की बात आती है तो हम आंखें क्यों मूंद लेते हैं?"
जनप्रतिनिधियों से की अपील
रविंद्र सिंह भाटी ने सभी जनप्रतिनिधियों से गरीब, वंचित और शोषित वर्ग की मदद करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों की सहायता करना केवल राजनीतिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है।विधायक ने कहा कि जो लोग जरूरतमंदों की मदद करते हैं, उन्हें जनता का आशीर्वाद और ईश्वर का साथ दोनों मिलता है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से संवेदनशीलता के साथ काम करने और आम लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता देने की अपील की।
मजदूरों के मुद्दे पर बढ़ी चर्चा
रविंद्र सिंह भाटी के इस बयान के बाद मजदूरों से जुड़े मुद्दे एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। उनके बयान को सामाजिक न्याय और श्रमिक अधिकारों के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।फिलहाल मजदूरों की मांगों और उनसे जुड़े विवाद को लेकर संबंधित पक्षों के बीच बातचीत और समाधान की संभावनाओं पर नजर बनी हुई है।

