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सरकारी अस्पतालों में दवाओं की खरीद में अनियमितता, एबीडी-प्लस सिरप 10 मिली पर मनमानी कीमत

सरकारी अस्पतालों में दवाओं की खरीद में अनियमितता, एबीडी-प्लस सिरप 10 मिली पर मनमानी कीमत

राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर में सरकारी अस्पतालों में दवाओं की खरीद प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। जिले के धोरीमन्ना उपजिला अस्पताल से लेकर ब्लॉक स्तर तक स्थानीय स्तर पर दवाइयों की खरीद की गई, लेकिन इसमें दरों में मनमानी और नियमों की अनदेखी की गई।

सूत्रों के अनुसार, सरकारी सप्लाई के अभाव में इन अस्पतालों को आवश्यक दवाइयाँ स्थानीय स्तर से खरीदनी पड़ीं। लेकिन जांच में यह सामने आया कि कई दवाइयों की कीमतें बाजार में उपलब्ध MRP से कहीं अधिक पर खरीदी गईं। सबसे गंभीर मामला एबीडी-प्लस सिरप 10 मिली का है, जिसे सरकारी अस्पताल ने बाजार मूल्य से अधिक भुगतान करके खरीदा।

स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है और जल्द ही इसकी विस्तृत जांच की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि ऐसे अनियमितताओं से न केवल सरकारी धन की बर्बादी होती है, बल्कि मरीजों को समय पर और उचित मूल्य पर दवाएँ उपलब्ध कराने में भी बाधा आती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की खरीदी और वितरण का पारदर्शी तंत्र होना आवश्यक है। इस तरह की मनमानी खरीद से न केवल भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ती है, बल्कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भी दवा उपलब्ध कराने में कठिनाई होती है।

धोरीमन्ना उपजिला अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि खरीद प्रक्रिया में स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं से दवाइयाँ ली गईं। लेकिन कई दवाओं की कीमतें MRP से अधिक होने के कारण यह मामला विवादास्पद बन गया है। ब्लॉक स्तर के अस्पतालों में भी समान परिस्थितियाँ देखी गईं, जिससे यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से बचने के लिए सरकारी नीतियों का कड़ाई से पालन, ऑडिट प्रक्रिया और नियमित निगरानी अनिवार्य है। उन्होंने सुझाव दिया कि अस्पतालों में दवा खरीद के लिए सेंट्रलाइज्ड ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम लागू किया जाना चाहिए, जिससे किसी भी प्रकार की मनमानी या भ्रष्टाचार की संभावना कम हो।

जिले में नागरिक और स्वास्थ्य कार्यकर्ता इस मामले को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द ही इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी होगी, बल्कि मरीजों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा कर सकती है।

स्वास्थ्य विभाग ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे।

इस प्रकार, बाड़मेर जिले के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं का मामला न केवल प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि यह आम जनता और मरीजों के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। विभागीय जांच और पारदर्शिता ही इस समस्या का समाधान साबित हो सकती है।

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