हनुमान बेनीवाल के काफिले में घुसी कार, समर्थकों ने डंडों और सरियों से की तोड़फोड़; वीडियो में सांसद बोले- 'जिन्हें दर्द है, वे दवाई ले लें'
राजस्थान के बाड़मेर जिले में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के काफिले के दौरान गुरुवार को हंगामे की घटना सामने आई। दांता गांव के पास बेनीवाल के काफिले के बीच एक कार के आने के बाद कुछ समर्थक और कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए। आरोप है कि उन्होंने कार पर सरियों, डंडों और लात-घूंसों से हमला कर उसमें जमकर तोड़फोड़ की।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि, पुलिस के अनुसार कार चालक की ओर से अब तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। शिकायत मिलने पर मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जनसभा के लिए जा रहे थे बेनीवाल
जानकारी के अनुसार, हनुमान बेनीवाल गुरुवार को जोधपुर से बाड़मेर पहुंचे थे। दोपहर करीब तीन बजे उन्होंने सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की। इसके बाद उनका काफिला देरासर में आयोजित जनसभा के लिए रवाना हुआ।रास्ते में दांता गांव के पास सामने से आ रही एक इनोवा कार कथित तौर पर काफिले के बीच में आ गई। इसी बात को लेकर मौके पर मौजूद आरएलपी कार्यकर्ता और समर्थक नाराज हो गए। इसके बाद कार पर हमला कर उसमें तोड़फोड़ किए जाने का मामला सामने आया।
जनसभा में बेनीवाल ने किया घटना का जिक्र
घटना के बाद देरासर में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी इस घटनाक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को इस बात से परेशानी है कि वह बाड़मेर क्षेत्र में दौरा कर रहे हैं।बेनीवाल ने अपने संबोधन में कहा, "लोगों के पेट में यह भी दर्द है कि हनुमान बेनीवाल यहां क्यों घूम रहा है। जिनके पेट में दर्द है, वे दवाई ले लें, उसका इलाज हो जाएगा।"उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पुलिस कर रही है मामले की पड़ताल
घटना के बाद पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई। फिलहाल पुलिस का कहना है कि पीड़ित पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। यदि शिकायत दर्ज होती है तो सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच की जाएगी।पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कार काफिले के बीच कैसे पहुंची और इसके बाद तोड़फोड़ की घटना किन परिस्थितियों में हुई।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
राजनीतिक नेताओं के काफिलों के दौरान इस तरह की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है, ताकि इस प्रकार की अप्रिय घटनाओं से बचा जा सके।फिलहाल मामले में किसी की गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने और जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

