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बालोतरा में किसानों का आक्रोश, एक्सक्लुसीव फुटेज में देखें SDM ऑफिस जाते समय पुलिस ने रोका, बेरिकेड्स पर हुआ विवाद

बालोतरा में किसानों का आक्रोश, एक्सक्लुसीव फुटेज में देखें SDM ऑफिस जाते समय पुलिस ने रोका, बेरिकेड्स पर हुआ विवाद

राजस्थान के बालोतरा जिले में किसानों का आक्रोश एक बार फिर सड़क पर देखने को मिला। गुड़ामालानी क्षेत्र के किसान अपनी लंबित मांगों को लेकर मंगलवार को एसडीएम कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। जगह-जगह बेरिकेड्स लगाकर किसानों को आगे बढ़ने नहीं दिया गया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।

किसानों को रोके जाने की सूचना मिलते ही किसान नेता और निर्वतमान प्रधान बिजलाराम मौके पर पहुंचे। उन्होंने मौके से ही एसडीएम को फोन कर कड़ी नाराजगी जाहिर की। बिजलाराम ने फोन पर कहा कि “आप नेताओं के चक्कर में बदमाशी कर रहे हो। एक के चक्कर में आप बलि चढ़ जाओगे। किसानों की मांगें अभी तक पूरी नहीं हुई हैं और हमें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने से रोका जा रहा है। आपसे लॉ एंड ऑर्डर भी ठीक से मेंटेन नहीं हो रहा है।”

दरअसल, बालोतरा जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र के किसान लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। किसानों की प्रमुख मांगों में फसल बीमा क्लेम का भुगतान, कृषि अनुदान की राशि जारी करना, स्थायी धरना स्थल की व्यवस्था और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाना शामिल है। किसानों का कहना है कि इन मांगों को लेकर कई बार प्रशासन को ज्ञापन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इन्हीं लंबित मांगों को लेकर आक्रोशित किसान मंगलवार को बड़ी संख्या में एसडीएम कार्यालय की ओर रवाना हुए। किसान ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों के साथ कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रहे थे, तभी पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस द्वारा लगाए गए बेरिकेड्स के कारण किसानों को आगे बढ़ने से रोका गया, जिससे किसान और पुलिस आमने-सामने आ गए।

मौके पर मौजूद किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है। किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने बिना किसी ठोस कारण के उन्हें रोक दिया। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रण में रखने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।

गौरतलब है कि इससे पहले भी 9 दिसंबर को किसान अपनी मांगों को लेकर ट्रैक्टरों और गाड़ियों में भरकर बाड़मेर कलेक्ट्रेट का घेराव करने पहुंचे थे। उस दौरान भी स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी, लेकिन प्रशासन की समझाइश के बाद किसान वापस लौट गए थे। किसानों का आरोप है कि उस समय प्रशासन ने उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला।

मंगलवार को हुए घटनाक्रम के बाद किसानों में फिर से नाराजगी बढ़ गई है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में स्थिति नियंत्रित बताई जा रही है, लेकिन किसानों का गुस्सा अब भी साफ नजर आ रहा है।

यह मामला एक बार फिर प्रशासन और किसानों के बीच संवाद की कमी को उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन किसानों की मांगों को लेकर क्या रुख अपनाता है और इस विवाद का समाधान कैसे निकलता है।

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