गिरल लिग्नाइट माइंस धरने को मिला राजनीतिक समर्थन, विधायक रविंद्र सिंह भाटी पहुंचे स्थल पर
बाड़मेर जिले में स्थित गिरल लिग्नाइट माइंस गेट पर पिछले 25 दिनों से जारी श्रमिकों के धरने को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। मंगलवार को विधायक रविंद्र सिंह भाटी धरनास्थल पर पहुंचे और श्रमिकों की मांगों का खुलकर समर्थन किया।
धरने पर बैठे श्रमिक लंबे समय से 8 घंटे की ड्यूटी, उचित वेतन, बोनस और स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। विधायक भाटी ने श्रमिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
इस दौरान उन्होंने माइंस प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि श्रमिकों की जायज मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि श्रमिक किसी भी उद्योग की रीढ़ होते हैं, और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
भाटी ने यह भी कहा कि यदि समय रहते श्रमिकों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन और उग्र हो सकता है। उन्होंने प्रशासन और प्रबंधन से जल्द वार्ता कर समाधान निकालने की अपील की।
धरनास्थल पर मौजूद श्रमिकों ने बताया कि वे पिछले 25 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा अब तूल पकड़ता जा रहा है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाएंगे। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों और प्रबंधन के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं। हालांकि अब तक किसी ठोस निर्णय की घोषणा नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की मांगों को नजरअंदाज करना लंबे समय में उत्पादन और विकास दोनों पर असर डाल सकता है। ऐसे में समय पर संवाद और समाधान बेहद जरूरी है। फिलहाल गिरल लिग्नाइट माइंस का यह धरना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और प्रबंधन इस मुद्दे का समाधान कैसे निकालते हैं।

