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बांसवाड़ा में स्कूल हादसा, वीडियो में देखें मरम्मत के बावजूद छत का प्लास्टर गिरा; 4 छात्राएं बाल-बाल बचीं

बांसवाड़ा में स्कूल हादसा, वीडियो में देखें मरम्मत के बावजूद छत का प्लास्टर गिरा; 4 छात्राएं बाल-बाल बचीं

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बांसवाड़ा जिले के घाटोल ब्लॉक स्थित अमरथून के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में 4 मई को कक्षा के दौरान छत का प्लास्टर अचानक गिर गया। इस घटना में कक्षा में पढ़ रही चार छात्राएं बाल-बाल बच गईं, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना उस समय हुई जब छात्राएं कक्षा में बैठकर पढ़ाई कर रही थीं। अचानक छत से प्लास्टर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर पड़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि भारी मलबा सीधे किसी छात्रा के सिर पर नहीं गिरा, वरना स्थिति गंभीर हो सकती थी।

स्थानीय लोगों और स्कूल प्रशासन के अनुसार, इस भवन की मरम्मत करीब दो वर्ष पहले लगभग 10 लाख रुपये की लागत से करवाई गई थी। इसके बावजूद छत से प्लास्टर गिरने की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कुछ ही महीने पहले झालावाड़ जिले में एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से बड़ा हादसा हुआ था। 25 जुलाई 2025 को हुई उस दर्दनाक घटना में 7 छात्रों की मौत हो गई थी, जिसने पूरे राज्य में आक्रोश और चिंता का माहौल पैदा कर दिया था। उस समय सरकार ने स्कूल भवनों की स्थिति सुधारने और सुरक्षा जांच के बड़े वादे किए थे।

हालांकि झालावाड़ हादसे के करीब नौ महीने बाद ही बांसवाड़ा में हुआ यह नया मामला बताता है कि स्कूल भवनों की स्थिति में अभी भी पूरी तरह सुधार नहीं हो पाया है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद नाराजगी देखने को मिल रही है और वे स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर तत्काल ध्यान देने की मांग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मरम्मत कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भवनों की नियमित जांच, गुणवत्ता नियंत्रण और निर्माण कार्यों की कड़ी निगरानी बेहद जरूरी है, ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।

फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि मरम्मत कार्य में कहीं कोई लापरवाही तो नहीं हुई थी। स्कूल में एहतियातन कुछ कक्षाओं की व्यवस्था बदली जा रही है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

यह घटना एक बार फिर इस ओर इशारा करती है कि शिक्षा संस्थानों की संरचनात्मक सुरक्षा पर गंभीर और सतत ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि बच्चों की जान को खतरे में पड़ने से बचाया जा सके।

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