Samachar Nama
×

प्रेम संबंध के लिए पति की हत्या, वीडियो में जाने सड़क पर कुचलकर की पहचान मिटाने की कोशिश; प्रेमी को उम्रकैद

प्रेम संबंध के लिए पति की हत्या, वीडियो में जाने सड़क पर कुचलकर की पहचान मिटाने की कोशिश; प्रेमी को उम्रकैद

राजस्थान के बांसवाड़ा में पति की हत्या के एक सनसनीखेज मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले में अभियोजन के अनुसार, एक विवाहित महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची थी, ताकि उसकी मौत के बाद बीमा की राशि का लाभ उठाया जा सके।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, वारदात दिसंबर 2024 में हुई थी। महिला ने कथित तौर पर अपने पति का विभिन्न बीमा कंपनियों से करीब 50 लाख रुपये का बीमा कराया था। आरोप है कि इसके बाद उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की योजना बनाई।

एडवोकेट योगेश सोमपुरा ने बताया कि घटना वाले दिन आरोपी प्रेमी ने पहले महिला के पति को शराब पिलाई। जब वह नशे की हालत में बेसुध हो गया, तो उसे सड़क पर लिटा दिया गया। इसके बाद आरोपी ने उस पर कार चढ़ा दी। अभियोजन के मुताबिक, पहचान छिपाने के उद्देश्य से आरोपी ने मृतक के सिर के ऊपर से कार के टायर तीन बार गुजारे।

हालांकि, शव की पहचान पूरी तरह मिट नहीं सकी। मृतक के हाथ पर बने "कालू" नाम के टैटू के आधार पर उसकी पहचान की गई, जिसके बाद पुलिस जांच आगे बढ़ी।

मामले की जांच तत्कालीन सदर थाना प्रभारी एवं जांच अधिकारी बुद्धाराम विश्नोई ने की। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर महत्वपूर्ण प्रमाण जुटाए। इन्हीं के आधार पर अदालत में मजबूत आरोप-पत्र (चार्जशीट) पेश किया गया।

अदालत में अभियोजन पक्ष ने 23 गवाहों के बयान और 98 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी प्रेमी को हत्या का दोषी माना और अपराध की क्रूरता को देखते हुए आजीवन कारावास तथा 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

यह मामला प्रेम संबंध, कथित बीमा लाभ और सुनियोजित हत्या की साजिश से जुड़ा होने के कारण बेहद चर्चित रहा। अदालत के फैसले को इस मामले में महत्वपूर्ण कानूनी निष्कर्ष माना जा रहा है।

नोट: प्रस्तुत जानकारी अदालत के फैसले और अभियोजन पक्ष के रिकॉर्ड पर आधारित है। यदि इस मामले में अन्य आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही लंबित है या अपील दायर की जाती है, तो आगे की न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार स्थिति में बदलाव संभव है।

 

Share this story

Tags