बांसवाड़ा के जवान को किया शौर्य चक्र से सम्मानित, वीडियो में जानें पिता का अंतिम संस्कार किया फिर नम आंखों से अवॉर्ड लिया
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के वीर सपूत और सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट राजेश पांचाल को नक्सलियों के खिलाफ मुठभेड़ में दिखाए गए अद्भुत साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए देश के तीसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान गुरुवार को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रदान किया गया।
घटना उस समय की है जब नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सीआरपीएफ की एक टीम सर्च ऑपरेशन पर थी। तभी नक्सलियों ने भारी गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में सहायक कमांडेंट राजेश पांचाल के हाथ में गोली लग गई। लेकिन घायल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पूरे आत्मविश्वास के साथ मोर्चा संभाले रखा। उन्होंने न केवल सामने से फायरिंग कर रहे नक्सलियों का मुंहतोड़ जवाब दिया, बल्कि अपने घायल साथी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाई।
इस साहसिक कार्रवाई में उन्होंने एक दुश्मन को मार गिराया और बाकी को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। यह मुठभेड़ न सिर्फ उनकी रणनीतिक दक्षता का परिचायक रही, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक सच्चा सैनिक विषम परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटता।
राजेश पांचाल की वीरता की खबर मिलते ही बांसवाड़ा जिले में खुशी और गर्व का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने पटाखे फोड़े, मिठाइयाँ बांटी और उनके परिवार को बधाइयाँ दीं। उनके माता-पिता और परिजन इस पल को गौरवपूर्ण और भावुक बताते हुए कहते हैं कि "राजेश बचपन से ही जुझारू और जिम्मेदार रहा है। उसका यह सम्मान पूरे इलाके के लिए गर्व की बात है।"
राष्ट्रपति द्वारा शौर्य चक्र से सम्मानित किए जाने के दौरान पूरे देश की निगाहें इस बहादुर जवान पर टिकी थीं। सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी राजेश के साहस की सराहना करते हुए कहा कि उनके जैसे जवान ही देश की आंतरिक सुरक्षा की असली रीढ़ हैं।
राजेश पांचाल की यह वीरगाथा न केवल आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगी, बल्कि देश सेवा की भावना को और भी प्रबल बनाएगी। यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि देश अपने सच्चे नायकों को कभी नहीं भूलता।

