अलवर में वन्यजीवों पर संकट, सड़क हादसे में लेपर्ड की मौत, फुटेज में देंखे 14 दिन में 3 तेंदुए और एक बाघ ने गंवाई जान
राजस्थान के अलवर और आसपास के इलाकों में वन्यजीवों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग और पर्यावरण प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार सुबह एक और लेपर्ड (तेंदुआ) मृत अवस्था में मिला। कुशालगढ़ से नारायणपुर रोड पर नांगलहेड़ी गांव के मुख्य मार्ग पर उसका शव पड़ा मिला, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। प्रारंभिक आशंका है कि किसी वाहन की टक्कर से उसकी मौत हुई है।
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सही कारणों की पुष्टि हो पाएगी, लेकिन सड़क हादसे की संभावना सबसे ज्यादा जताई जा रही है।
चिंताजनक बात यह है कि पिछले 14 दिनों में अलवर और उससे सटे कोटपुतली-बहरोड़ जिले में तीन लेपर्ड और एक बाघ की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इससे पहले 7 फरवरी को कोटपुतली-बहरोड़ जिले के नारायणपुर के खरकड़ी गांव में एक किसान ने लेपर्ड पर हमला कर उसे कुल्हाड़ी से मार दिया था। बताया गया था कि जानवर के खेत में आने से घबराकर किसान ने यह कदम उठाया। वहीं 26 जनवरी को प्रतापगढ़ के गुवाड़ा क्षेत्र में एक लेपर्ड पेड़ पर फंदे से लटका मिला था, जिससे शिकार या अवैध गतिविधि की आशंका जताई गई थी।
सबसे बड़ी क्षति 2 फरवरी को सामने आई थी, जब सरिस्का के अकबरपुर रेंज में बाघिन ST-28 का शव जंगल में मिला। करीब 24 घंटे पुराना शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया था। बाघिन की मौत ने सरिस्का टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए थे।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों का बढ़ता ट्रैफिक, इंसानों और जंगली जानवरों के बीच बढ़ता टकराव और शिकार की घटनाएं इन मौतों की बड़ी वजह बन रही हैं। हाईवे और ग्रामीण सड़कों पर स्पीड कंट्रोल और चेतावनी संकेतों की कमी भी जानवरों के लिए खतरा साबित हो रही है।
वन विभाग ने दावा किया है कि गश्त बढ़ाई जा रही है और संवेदनशील इलाकों में निगरानी कड़ी की जा रही है। साथ ही ग्रामीणों को भी जागरूक करने की कोशिश की जा रही है ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम हो सके।
लगातार हो रही इन मौतों से पर्यावरण प्रेमियों में रोष है। उनका कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र की जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ सकता है। फिलहाल, विभाग पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है और मामले की जांच जारी है।

