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अलवर में 50 करोड़ की सरकारी जमीन पर भू माफिया का कब्ज़ा, वीडियो में जानें 150 फर्जी पट्टों से बैंक लोन, 6 पट्‌टों पर सरपंच के परिवार का नाम

अलवर में 50 करोड़ की सरकारी जमीन पर भू माफिया का कब्ज़ा, वीडियो में जानें 150 फर्जी पट्टों से बैंक लोन, 6 पट्‌टों पर सरपंच के परिवार का नाम

अलवर जिले में सरकारी और गोचर भूमि से जुड़े एक बड़े कथित घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को भू-माफिया द्वारा हड़पने के आरोप लगाए गए हैं। यह मामला अलवर के रामगढ़ रोड स्थित देसूला क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां अलवर UIT की प्रस्तावित नई आवासीय योजना विकसित की जानी थी।

आरोप है कि योजना से पहले ही भू-माफिया ने जमीन पर कब्जा दिखाते हुए करीब 150 फर्जी पट्टे तैयार कर लिए और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न बैंकों से करोड़ों रुपये का लोन भी उठा लिया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन पट्टों पर पूर्व ग्राम विकास अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर किए गए, जो वर्तमान में RAS ट्रेनिंग पर हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दस्तावेजों में किए गए हस्ताक्षर बेहद असामान्य और संदिग्ध पाए गए हैं, जिन्हें देखकर यह आशंका जताई जा रही है कि इन्हें जानबूझकर फर्जी तरीके से तैयार किया गया।

स्थानीय स्तर पर जब इस मामले की जानकारी सामने आई तो लोगों ने दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की। जांच में सामने आया कि फर्जीवाड़ा काफी बड़े स्तर पर किया गया है और इसमें संगठित गिरोह की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद 5 मई को जांच की जिम्मेदारी जिला परिषद के सीईओ सालुखे गौरव रविंद्र को सौंपी गई थी। हालांकि, अब तक न तो फर्जी पट्टे रद्द किए गए हैं और न ही पुलिस की ओर से कोई एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की गई है।

इस देरी को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं और आरोप लगाए जा रहे हैं कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर दावा किया जा रहा है कि जांच प्रक्रिया जारी है और सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में जमीन रिकॉर्ड, पट्टा सत्यापन और बैंक लोन प्रक्रिया की गंभीर जांच आवश्यक होती है, क्योंकि यह मामला केवल जमीन कब्जे का नहीं बल्कि वित्तीय धोखाधड़ी से भी जुड़ा हो सकता है।

फिलहाल पूरे मामले ने प्रशासन और भू-माफिया गठजोड़ को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच कब तक पूरी होती है और क्या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है या नहीं।

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