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सत्र खत्म होने से पहले मिली ग्रांट, अलवर के स्कूलों के लिए खर्च करना बना चुनौती

सत्र खत्म होने से पहले मिली ग्रांट, अलवर के स्कूलों के लिए खर्च करना बना चुनौती

राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम चरण में राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूलों को कम्पोजिट ग्रांट जारी की है। अलवर जिले के 553 स्कूलों को कुल 3.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन सत्र समाप्ति से ठीक पहले राशि जारी होने से स्कूलों के सामने इसे समय पर खर्च करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

जानकारी के अनुसार, यह राशि सत्र समाप्ति से महज तीन कार्य दिवस पहले स्कूलों के खातों में पहुंची है। ऐसे में स्कूल प्रशासन के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत इस बजट का उपयोग करना बेहद कठिन हो गया है। नियमानुसार, इस राशि का उपयोग तय मदों में ही करना होता है, जिसके लिए प्रक्रिया और योजना बनाना आवश्यक होता है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कम्पोजिट ग्रांट का उद्देश्य स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार करना, शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना और छोटे-मोटे रखरखाव कार्यों को पूरा करना है। लेकिन समय की कमी के चलते कई स्कूलों में इस राशि के सही उपयोग को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

स्कूल प्रबंधन समितियों और प्रधानाचार्यों का कहना है कि इतनी कम अवधि में पारदर्शिता के साथ खर्च करना संभव नहीं है। यदि जल्दबाजी में राशि खर्च की जाती है, तो गुणवत्ता और नियमों के पालन पर असर पड़ सकता है।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह सत्र के अंतिम समय में फंड जारी करने से उसका उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता। उन्होंने सुझाव दिया है कि ऐसी ग्रांट समय रहते जारी की जानी चाहिए, ताकि स्कूल उसे योजनाबद्ध तरीके से उपयोग कर सकें।

फिलहाल, स्कूल प्रशासन इस असमंजस में है कि सीमित समय में किस तरह इस राशि का सही और प्रभावी उपयोग किया जाए। यह स्थिति वित्तीय प्रबंधन और योजना निर्माण पर भी सवाल खड़े करती है।

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